यूपी के चर्चित कारतूस कांड में कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सीआरपीएफ के दो हवलदारों समेत 24 आरोपियों को दोषी करार दिया। साथ ही, सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। कोर्ट उन्हें शुक्रवार को सजा सुनाएगा। दोषियों में चार नागरिक और 20 पुलिस, पीएसी व सीआरपीएफ के कर्मचारी हैं। मुख्य आरोपी यशोदानंदन की ट्रायल के दौरान ही मौत हो चुकी है।
सुरक्षाबलों के कारतूस की नक्सलियों को बिक्री के मामले में एसटीएफ के इंस्पेक्टर आमोद कुमार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यशोदानंदन की डायरी से अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। तब मुरादाबाद पीटीएस में तैनात आर्मरर नाथीराम सैनी समेत बस्ती, बनारस व गोंडा समेत कई जिलों से पुलिस व पीएसी के आर्मरर गिरफ्तार किए गए थे। सपा सरकार ने केस वापस लेने की कवायद शुरू की थी। उसके पत्र पर अभियोजन पक्ष और कोर्ट ने आपत्ति जताई, तो केस वापस नहीं हो सका था।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 2010 में अपनी ही गोली से सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे। इस बात का खुलासा कारतूस कांड के मुख्य आरोपी यशोदानंदन की डायरी से हुआ था। डायरी में साफ लिखा था कि पुलिस और सीआरपीएफ के मालखानों से हथियार और कारतूस चोरी कर लिए जाते थे और फिर इनको नागरिकों के जरिए नक्सलियों के जरिए पहुंचाया जाता था। बदले में नक्सली मुंह मांगी कीमत भी अदा करते थे।