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सांगला वैली में फुल्याच मेले की धूम

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सांगला (किन्नौर)।
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निचार खंड के रूपी के बाद अब सांगला वैली सहित जिले के कई अन्य ग्रामीण इलाकों में फुल्याच यानी उखयांग का विशेष मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। जिले के पुनंग, रामनी, बारंग, मेबर, किल्बा, सापनी, कनई, बटुरी, ब्रुआ, शौंग, किल्बा, चांसू, कामरू, सांगला, बटसेरी, रक्षम सहित अन्य क्षेत्रों में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
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किन्नौर जिले के कई ग्रामीण इलाकों में फुल्याच मेला मनाया जा चुका है। हालांकि बचे हुए ग्रामीण क्षेत्रों में चार और पांच सितंबर से यह विशेष पर्व मनाया जाएगा। जनजातीय जिला किन्नौर की समृद्ध लोक संस्कृति में फूलों के मेले फुल्याच की अपनी एक अलग पहचान है। भादो माह में मनाए जाने वाले इस मेले का मूल उद्देश्य यह है कि साल भर की थकान को मिल बैठ कर दूर करें। पांच दिनों तक लोग अपने सगे संबंधियों के साथ एक समय का भोजन देवी-देवताओं की ओर से चिन्हित स्थानों पर जाकर खुले आसमान के नीचे बैठ कर करते हैं। यह विशेष पर्व दस भादो से जिले के दूरदराज गांव रूपी से शुरू होता है। इसके बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में 20 भादों से यह मेला शुरू होता है। इस मेले से एक रोज पूर्व गांव के युवा और भेड़ पालक पहाड़ियों पर चले जाते हैं और वहां से ब्रह्मकमल रत्नज्योत सहित बेशकीमती फूल लाकर अपने आराध्य देवी-देवताओं को चढ़ाते हैं। सभी ग्रामीण मिलकर पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर देव स्थलों पर पहुंच कर नृत्य करते हैं। बटसेरी गांव के बद्रीनारायण, विष्णु नारायण और तपोनारायण के माथास गर्वधन शानटेश्टो और सुरेंद्र नेगी ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस साल भी इस विशेष मेले को मनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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