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मनरेगा में मानव दिवस सृजित करने में भी हीलाहवाली

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रामपुर। मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को मजदूरी मुहैया कराने के लिए मानव दिवस सृजन में भी विभागीय कर्मी लापरवाही बरत रहे हैं। हालात यह है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में किसी ब्लॉक में एक फीसदी से भी कम मानव दिवस सृजित हो सके हैं तो कहीं पांच-छह फीसदी ही लक्ष्य पूरा हो सका है। लापरवाही पर सीडीओ व डीसी मनरेगा ने विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के साथ ही पंजीकृत मजूदर (जॉब कार्ड धारक) ग्रामीणों को मानव दिवस सृजित कर रोजगार मुहैया कराया जाता है। लेकिन, जिले में मनरेगा के तहत मानव दिवस सजित किए जाने की प्रक्रिया कछुआ चाल से भी सुस्त चल रही है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जॉब कार्ड धारकों को मजदूरी से लेकर विकास कार्यों तक की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है।
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मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजित किए जाने के मामले में स्वार ब्लॉक सबसे फिसड्डी साबित हो रहा है। स्वार ब्लॉक में मौजूदा वित्तीय वर्ष में 89349 मानव दिवसों के लक्ष्य के सापेक्ष कुल 526 मानव दिवस ही सृजित किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का महज 0.59 फीसदी है। शाहबाद में कुल लक्ष्य 45353 मानव दिवसों के सापेक्ष महज 1.85 फीसदी लक्ष्य ही हासिल हो सका है। बिलासपुर में 46580 मानव दिवस लक्ष्य के सापेक्ष 4.14 फीसदी, मिलक में 46844 मानव दिवस के लक्ष्य के सापेक्ष 7.11 फीसदी, चमरौआ में 34489 मानव दिवस लक्ष्य के सापेक्ष 8.05 फीसदी और सैदनगर में 33318 मावन दिवस लक्ष्य के सापेक्ष 14.27 फीसदी लक्ष्य ही हासिल हो सका है।
मानव दिवस सृजन के लक्ष्य में पिछड़ने पर सभी बीडीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही तकनीकी सहायक, रोजगार सेवकों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
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कोट
मनरेगा में कार्य सुधार के निर्देश दिए गए हैं। डीसी मनरेगा को सभी बीडीओ, एपीओ, तकनीकी सहायकों और अन्य कर्मियों के साथ समन्वय कर प्रस्ताव तैयार करने व कार्य प्रगति में सुधार के निर्देश दिए हैं। निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। -शिवेंद्र कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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