बिन गुरु कैसे हुनरमंद बने आईटीआई के छात्र-छात्राएं
रामपुर। वैसे तो जिले में युवाओं को हुनर की ताकत देकर रोजगार हासिल करने के लिए पांच राजकीय आईटीआई संचालित हो रही हैं। लेकिन, इनमें हुनर देने वाले गुरु ही नहीं हैं तो छात्र-छात्राएं किससे और कैसे हुनर हासिल करें। महज बिल्डिंग खड़ी करके सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ ली है। हालात यह हैं कि 5 में से 3 आईटीआई में तो प्राचार्य का पद ही रिक्त है। जबकि कार्यदेशकों के 8 और अनुदेशकों के 63 पद रिक्त हैं।
बिना अनुदेशक और कार्यदेशक जिले में संचालित हो रहीं राजकीय आईटीआई महज एक दिखावा साबित हो रही हैं। इनमें छात्र-छात्राएं प्रवेश तो ले रहे हैं लेकिन, उन्हें वो ज्ञान और हुनर हासिल नहीं हो पा रहा है, जिसके लिए वे यहां आते हैं। मजबूरी में बिना अनुदेशक और कार्यदेशकों के ही छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी कर कैरियर की भागदौड़ में लग जाते हैं। लेकिन, वहां पर उन्हें बिना ट्रेनर हासिल की गई ट्रेनिंग का असर महसूस होता है।