रामपुर। सांसद आजम खां ने कहा है कि तीन तलाक नहीं बल्कि बच्चों का इलाज अहम मुद्दा होना चाहिए। यहां तो अहम मुद्दों को गौण कर एक खास वर्ग के लोगों की मजहबी आस्था के खिलवाड़ की तैयारी कर ली गई है। बच्चों का इलाज, नौकरी और शिक्षा जैसे मुद्दे तो जैसे गायब ही हो गए हैं।
आजम खां ने शनिवार को जौहर यूनिवर्सिटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने सदन में तीन तलाक बिल रखा है। अगर यह बिल कुरान के मुताबिक है तो स्वीकार है। उन्होंने कहा कि आखिरकार मुसलमानों पर इतनी करमनवाजी क्यों। दूसरे लोग तलाक दें तो सजा नहीं या कम सजा का प्रावधान। मुसलमानों को तीन गुना ज्यादा सजा। यह कहां का इंसाफ है। ऐसे में तो लोगों का शादी-ब्याह पर से आस्था ही खत्म हो जाएगी। आखिर निकाह ही क्यों करें। अमेरिका, इंग्लैंड की तरह हिन्दुस्तान में भी लि विंग रिलेशनशिप का प्रचलन बढ़ जाएगा। सरकार को इसको भी मान्यता देनी पड़ेगी। आखिरकार सरकार क्या संदेश देना चाहती है। तीन तलाक बिल का तो विरोध होगा। इसे सदन में पेश किए जाने के ही विरोध का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि कुरान में सब बातें हैं। उसमें बताया निकाह और तलाक के बारे में भी बताया गया है। हमारे लिए तो कुरान की बात ही पत्थर की लकीर है।