रामपुर। करीब एक दशक पहले बना रामपुर विकास प्राधिकरण भले ही एक भी कालोनी नहीं बना सका हो, लेकिन नोटिस खूब जारी किए जाते हैं। नक्शे के नाम पर जारी किए जाने वाले इन नोटिसों पर कार्रवाई भी नहीं हो पाती। अफसर कार्रवाई से बचते हैं। यहां अब भी करीब दो दर्जन मामले लंबित पड़े हैं।
वर्ष 2006 में रामपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई थी। मकसद था कि शहर नगारिकों को सस्ते मकान उपलब्ध हो सकें। नियोजित कालोनी बने और शहर साफ सुथरा दिखे। लेकिन, एक दशक से भी अधिक समय बीतने के बाद भी प्राधिकरण एक भी कालोनी विकसित नहीं कर सका। सिर्फ नक्शे के नाम लोगों को नोटिस जरूर भेजे जाते हैं, लेकिन इन नोटिसों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। सांठ गांठ कर मामलों का रफा दफा कर दिया जाता है। पिछले वित्त वर्ष की ही बात की जाए तो रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से 80 से अधिक नोटिस जारी किए गए, लेकिन अधिकांश मामले अभी लंबित पड़े हैं। कुछ भवनों को सील करने के बाद जरूर खोल दिया गया। आरडीए सचिव बैजनाथ का कहना है कि जमीन के अभाव में कालोनी का निर्माण नहीं हो सका। अवैध कालोनियों पर शिकंजा कसा जाता है। पहले नोटिस जारी किए जाते हैं, जिसमें नक्शा पास कराने के लिए निर्धारित शुक्ल जमा करने का प्रावधान होता है। यदि नोटिस के बाद शुक्ल जमा करा दिया जाता है, तो मामला निस्तारित कर दिया जाता है। यदि शुल्क जमा नहीं होता है तो आगे की कार्रवाई होती है, जिसमें समन करने से लेकर निर्माणाधीन कार्यों को ध्वस्त करने और सील करने तक की कार्रवाई की जाती है।