रामपुर। मडिया नादरबाग में 17 वर्ष पूर्व बसाई कांशीराम आवासीय कॉलोनी में बने 1272 आवास सिस्टम की उदासीनता के कारण जर्जर हो गए हैं। यहां रहने वाले परिवार हर रोज डर के साए में जिंदगी गुजार रहे हैं। ज्यादातर मकानों की दीवारें झड़ रही हैं और छतें भी गिरने की हालत में हैं। उनमें लगी सरिया साफ दिख रही हैं। भवनों की दीवारों में मोटे-मोटे पीपल, बरगद के पौधे उग आए हैं।
शहर के मडिया नादरबाग में कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण वर्ष 2007 में बसपा सरकार में हुआ था। आरडीए इसकी कार्यदायी संस्था थी। इनमें 1272 क्वाटर बने हैं और इनमें परिवार भी रह रहे हैं। गरीबों को आवंटित करने के बाद प्रशासन इन आवासों के रखरखाव की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को इन आवासों का जायजा लिया। इसमें अधिकांश आवासों के छज्जे टूटे मिले। दीवारों में पौैधे निकल आए हैं। प्लास्टर गिर रहा है। दीवारों में लोहे की खिड़कियां तक गल चुकी हैं। परिसर के चारों ओर गंदगी है। सीढि़यां टूट रही हैं। छत को बचाने के लिए लोगों ने ऊपर से सीमेंट की चट्टी चढ़ाई हुई है। बारिश में घर के अंदर पानी न आए इस कारण लोगों ने पन्नी लगा रखा है।
दीवारों में कई जगह दरारें आई हुई हैं। जिन लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक है उन्होंने मरम्मत और पेंट किया हुआ है। अन्य आवासों की हालत बहुत खराब है।