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देश पर न्यौछावर किए प्राणए शहीद सतीश कुमार को भूल गई सरकार

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कुमारसैन (रामपुर)।
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कारगिल युद्ध के दौरान कुमारसैन तहसील के वीर सपूत सतीश कुमार शहीद हो गए थे। सतीश कुमार कुमारसैन तहसील के बड़ागांव सांगरी के रहने वाले थे। 28 वर्ष की उम्र में कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए उन्होंने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए थे। 21 अप्रैल 1972 को कर्मचंद और आमलू देवी के घर सतीश वर्मा ने जन्म लिया। सतीश डोगरा रेजीमेंट में वर्ष 1989 में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे।
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शहीद की पत्नी सलोचना ने कहा कि शहीदों के परिवार को सरकार ने पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां, नौकरी, बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा तथा प्लॉट आदि प्रदान किए। लेकिन उनको इनमें से कोई सुविधा नहीं मिली। सरकार की ओर से उन्हें न तो कोई मदद मिली और न ही शहीद के परिवार को सम्मान दिया गया। सरकार ने बड़ागांव स्कूल का नाम उनके पति शहीद सतीश कुमार के नाम पर रखने का आश्वासन दिया था, जो पूरा नहीं हुआ। बड़ागांव स्कूल में शहीद की प्रतिमा बनाने की बात कही गई थी। लेकिन शहीद की प्रतिमा को परिवार ने बाद में अपने दम पर स्थापित किया है। दुश्मनों से लोहा लेते हुए सतीश ने तीन दुश्मनों को मार गिराया था और खुद भी शहीद हो गए थे। सलोचना ने कहा कि उनके पति देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए, जो गौरव की बात है। सतीश कुमार अपने पीछे पत्नी एक बेटा, एक बेटी और अपनी माता को छोड़ गए। उनके पिता की पहले ही मृत्यु हो गई थी। सतीश कुमार जब शहीद हुए तो उनका बेटा पुनिश उस समय अढ़ाई वर्ष का था, जबकि बेटी सुष्मिता पांच वर्ष की थी। उन्होंने अपने दम पर बच्चों को शिक्षा प्रदान की है। बेटी आज एमबीए कर रही है और बेटा पुनिश बीसीए। मदद के नाम पर वर्ष 2011 में जाकर सलोचना को नौकरी मिली, जिससे गुजारा नहीं हो रहा।
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