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अस्थमा और कैंसर के लिए गुणकारी पीली सरसों

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अस्थमा और कैंसर के लिए गुणकारी पीली सरसों
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रामपुर। खाने में इस्तेमाल की जाने वाली पीली सरसों सिर्फ त्चचा और बालों के लिए ही नहीं, बल्कि अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए भी बेहद गुुणकारी है। राजकीय रजा महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बेबी तबस्सुम के शोध में यह खुलासा हुआ है।
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मूलरूप से बरेली की रहने वाली डॉ. बेबी तबस्सुम शुऐब राजकीय रजा महाविद्यालय में वनस्पति विभाग में सहायक प्रवक्ता हैं। करीब दो साल पहले उन्होंने स्वास्थ्य पर सरसों के प्रभाव को लेकर रिसर्च शुरू की। इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने पाया कि पीली सरसों कैंसर जैसी बीमारी के लिए भी बेहद कारगर है। डॉ. बेबी तबस्सुुम ने बताया कि उन्होंने चूहों पर रिसर्च की है। इसके लिए चूहों में कैंसर के ब्लड सेल्स डाले गए और अध्य्यन शुरू कर दिया। इस दौरान जब चूहों में सरसों के सेल्स डाले गए, तो सामने आया सरसों से एक पतली लेयर बन रही है, जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। इससे कैंसर के सेल्स नहीं पनप पा रहे हैं और मूत्र के जरिए बाहर निकल रहे हैं। बताया कि सरसों में ग्लूकोसिनोलेट तत्व है, जो एंटी-कार्सिनोजेनिक गुणों के लिए जाना जाता है। यही तत्व कैंसर को शरीर में बढ़ने से रोकता है। इसमें मौजूद फाइटोन्यूट्रियन्स कोरोरेक्टल तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर को नहीं पनपने देते। डॉ. बेबी तबस्सुम शुऐब ने बताया कि पीली सरसों अस्थमा को लेकर कारगर है। उन्होंने बताया कि कैंसर रिसर्च के दौरान कुछ चूहों मेथं सांस की समस्या देखने को मिली। जांच की तो पता लगा कि यह अस्थमा का अटैक था। इसके बाद उन चूहों को अलग कर दिया गया और पीली सरसों के सेल्स डाले गए, जिससे अस्थमा की समस्या दूर हो गई। इसके अलावा सरसों में मौजूद एंटी फंगल तथा एंटी बैक्टीरिया त्वचा संबंधी संक्रमण को रोकते हैं। इसमें मौजूद विटामिन-ई एक सन शील्ड के रूप में काम करता है, चजिससे त्वचा मुलायम हो जाती है और साथ ही साथ पिम्पल से भी छुटकारा मिलता है। इसका प्रयोग झुर्रियों से भी बचाता है।
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