हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस भले ही मनाया जाता हो, लेकिन धरती को हरा भरा रखने के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं। हरियाली मिटाई जा रही है। रोपित किए जाने वाले पौधों को बचाने तक में कंजूसी बरती जा रही है।
यूं रहा तो धरती पर जीवन का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए जरूरी है कि आओ पौधे लगाएं और धरती को हरा भरा बनाने में सार्थक कदम उठाएं। इस बार जिले में 11 लाख 20 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य मिला है। इसमें करीब दस लाख पौधे रोपित किए जा चुके हैं।
विभाग के अफसरों का दावा है कि पौधे रोपित का कार्य शुरू है और हरियाली लाने के लिए तेजी से प्रयास हो रहे हैं। पर हकीकत ये है कि विभाग की तरफ से हर साल भारी तादाद में पौधे रोपित करने का दावा तो किया जाता है, लेकिन देखभाल के अभाव में जिले को हरा भरा बनाने का सपना हकीकत में नहीं बदल पा रहा है।
वजह सिंचाई के अभाव में पौधे सूख रहे हैं। यही नहीं ट्रीगार्ड बनाने में भी मनमानी की जा रही है। इससे पशु रोपित किए गए पौधों को चट कर जाते हैं। इसको लेकर तेजी नहीं दिखाई जा रही है। इस लापरवाही से 30 फीसदी से अधिक पौधे सूख गए हैं या फिर उन्हें पशुओं ने चट कर दिया है।
कृष्ण मोहन और राकेश कुमार कहते हैं कि पेड़ों की कटान का असर न सिर्फ लोगों के जनजीवन पर, बल्कि मौसम पर पड़ा है। बारिश कम हो रही है। साथ ही लोग तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जरूरी है कि अधिक से अधिक लोग पौधे रोपित करें, ताकि जिले को हरा भरा बनाने का सपना साकार हो सके।