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Raebareli News: ठिठुरते स्कूल पहुंच रहे डेढ़ लाख नौनिहाल, स्वेटर का इंतजार

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रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त आदेश के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सुस्ती का खामियाजा नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है। ठंड बढ़ने के बाद भी करीब डेढ़ लाख बच्चे हर रोज बिना स्वेटर व जूता-मोजा के स्कूल पहुंच रहे हैं। सुबह ठंड अधिक होने के कारण बच्चे ठिठुर रहे हैं, लेकिन बच्चों पर किसी की भी नजर नहीं पड़ रही है। विभाग 60 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों को स्वेटर आदि खरीदने के लिए बजट भी नहीं दे पाया है।
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जिले के 2200 से अधिक परिषदीय स्कूलों के तीन लाख से अधिक बच्चों को ड्रेस, स्वेटर, जूता-मोजा, बैग आदि की खरीदारी के लिए अभिभावकों को 1200-1200 रुपये देने की व्यवस्था की गई है। बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि अब तक 2.40 लाख अभिभावकों के खाते में बजट भेजा जा चुका है।
60 हजार अभिभावकों के खातों में बजट भेजने की प्रक्रिया चल रही है। ठंड बढ़ गई है, लेकिन परिषदीय स्कूलों के बच्चे बिना स्वेटर और जूता मोजा के ही स्कूल पहुंच रहे हैं। डेढ़ लाख से अधिक बच्चों के पास स्वेटर तक उपलब्ध नहीं है।
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जिले में 16 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में सीधे बेसिक शिक्षा विभाग को ही सभी 1600 छात्राओं तक स्वेटर पहुंचाना है, लेकिन इन छात्राओं को भी स्वेटर नसीब नहीं हुआ है। पुराने स्वेटरों और ड्रेस के भरोसे छात्राएं काम चला रही हैं। ठंड बढ़ने से छात्राओं को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन विभागीय ठेकेदार ने अब तक स्वेटर बच्चियों तक नहीं पहुंचाया है।
शिवगढ़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय ढोढ़वापुर में सोमवार को आधे से अधिक बच्चे स्वेटर नहीं पहने थे। कई बच्चों के अभिभावकों को स्वेटर खरीदने के लिए अब तक बजट भी नहीं मिला, जबकि कई अभिभावकों ने बजट मिलने के बाद भी स्वेटर, जूता और मोजा नहीं खरीदा। हर रोज बच्चे ठिठुरते स्कूल पहुंच रहे हैं। इंचार्ज हेडमास्टर मीना वर्मा का कहना है कि सभी बच्चों के अभिभावकों को स्वेटर खरीदने के लिए कहा गया है।
हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के मुबारकपुर स्थित परिषदीय स्कूल के बच्चे भी स्वेटर व जूता-मोजा के आ रहे हैं। दो दिन पहले महाकवि सुब्रह्मण्य भारती की जयंती पर भी बच्चे बिना ड्रेस व स्वेटर के ही स्कूल पहुंचे। इस स्कूल के बच्चों के लिए भी अब तक पूरा बजट विभाग से अभिभावकों को न मिल पाने के कारण बच्चे बिना स्वेटर के ही स्कूल पहुंच रहे हैं। विभागीय अधिकारी भी लापरवाही को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
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