यह तो सिर्फ वह आंकड़े हैं, जिनका पशु पालन विभाग के डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया। ऐसे ही तमाम आवारा पशु पॉलीथिन खाने से आए दिन दम तोड़ रहे हैं।
इसका सबसे ज्यादा असर शहरी इलाकों में दिख रहा है। शहर और नगरीय इलाकों में पॉलीथिन के बैग में ही खाने-पीने का सामान भर कर कूड़े में फेंक दिया जाता है।
आवारा ही नहीं पशुपालकों द्वारा छोड़े गए पशु खाने के सामान के साथ ही पॉलीथिन भी खा जाते हैं। इससे उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ जाती है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष ही 10 से अधिक पशुओं की पॉलीथिन खाने से मौत हुई। पॉलीथिन खाकर दम तोड़ने वाले मवेशियों में दुधारू पशु भी शामिल होते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. केके चौधरी का कहना है कि पॉलीथिन मवेशियों के लिए जहर का काम करता है। पॉलीथिन गलती नहीं है।
पशु जब पॉलीथिन खाता है तो वह उसके आंतों में फंस कर उसे जाम कर देती है। इसके बाद धीरे-धीरे पशु चारा-पानी छोड़ देता है। साथ ही उसका पेट फूलने लगता है। इस तरह से उसकी मौत हो जाती है।