बलरामपुर। जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का...ये लाइनें प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में जिले का नाम रोशन करने वाले पैरा ओलंपिक खिलाड़ी हर्षवर्धन मणि दीक्षित पर पूरी तरह से फिट बैठती हैं। स्पाइनल कार्ड इंजरी ने हर्षवर्धन के कदम तो रोक दिए, मगर उड़ान का जुनून नहीं रोक सकी।
आज भी वह खेल मैदान में व्हीलचेयर पर बैठकर वही जोश लेकर उतरते हैं, जैसे 16 साल पहले उतरे थे। उन्होंने राष्ट्रीय पैराबोसिया चैंपियनशिप में दो स्वर्ण जीतकर साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति और मेहनत के आगे शरीर की सीमाएं छोटी पड़ जाती हैं। अब तक 20 से अधिक पदक जीतकर उन्होंने उत्तर प्रदेश का नाम देशभर में रोशन किया है।
हर्षवर्धन बताते हैं कि 30 मई 2009 को जिम्नास्टिक की प्रैक्टिस करते समय उन्हें सर्वाइकल इंजरी हुई थी। दिल्ली में ऑपरेशन और चार साल इलाज के बाद वह व्हीलचेयर पर लौटे। संघर्ष ज्यादा था, पर इरादा उससे भी बड़ा। हर्षवर्धन ने कहा, खेल मेरी ताकत है। मैं चल नहीं सकता, पर रुकना भी नहीं चाहता।
क्रीड़ाधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि हर्षवर्धन ने बीते वर्ष जालंधर में आयोजित व्हीलचेयर मैराथन और क्लब थ्रो में रजत पदक जीता, उप्र पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में दूसरा स्थान पाया और राष्ट्रीय पैराबोसिया चैंपियनशिप में दो स्वर्ण हासिल किए। उनके प्रयास और उपलब्धियां जिले के अन्य युवा खिलाड़ियों और दिव्यांगजनों के लिए मिसाल हैं।
हार नहीं मानी : हर्षवर्धन
हर्षवर्धन कहते हैं कि जब डॉक्टरों ने कहा कि अब चल पाना संभव नहीं है, तभी उन्होंने यह तय कर लिया कि हार माननी नहीं है। उनकी नजर में दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि खुद को साबित करने की नई चुनौती थी। वह कहते हैं कि जिस चीज ने मुझे गिराया, उसी ने मुझे आगे बढ़ने की ताकत दी।
दिव्यांगों के हौसलों को बढ़ा रहा विभाग
जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी तनुज त्रिपाठी ने बताया कि जिले में दिव्यांगजनों के लिए अनेक योजनाएं संचालित हो रही हैं। इस समय दस हजार से अधिक दिव्यांगजन प्रतिमाह एक हजार रुपये की दिव्यांग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। लगभग 250 लाभार्थियों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह की कुष्ठावस्था पेंशन दी जा रही है।
सहायक उपकरण वितरण में तीन हजार से अधिक दिव्यांगजन ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, कान की मशीन और अन्य उपकरण प्राप्त कर चुके हैं। दुकान निर्माण एवं संचालन योजना से 150 से अधिक दिव्यांगजन अपनी आजीविका चला रहे हैं। शादी पुरस्कार योजना के तहत 200 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित किए जा चुके हैं। इस वित्तीय वर्ष में 03 से 07 वर्ष के 55 दिव्यांग बच्चों को मुख्य धारा की शिक्षा से जोड़कर निशुल्क पढ़ाई कराई जा रही है। कॉक्लियर इंप्लांट योजना के तहत 10 बच्चों को सुनने और बोलने की क्षमता वापस मिली है, जो परिवारों के लिए बड़ी राहत बनी है।