रायबरेली। राही ब्लॉक के सैदनपुर गांव में 10 माह पहले पाइपलाइन बिछाई गई थी। घरों में टोटियां लगा दी गईं। बावजूद इसके आज तक पानी नहीं आया। वजह, अभी पानी की टंकी नहीं बन सकी है।
ग्रामीण हौसला सिंह, गुड्डन सिंह, राजीव त्रिवेदी बताते हैं कि गांव में हैंडपंप खराब पड़े हैं। पानी की आपूर्ति भी शुरू नहीं हो पाई है। गर्मी में पानी की किल्लत से मुसीबत और बढ़ेगी। यही हाल करीब 711 अन्य गांवों का है, जहां पर पानी की आपूर्ति शुरू नहीं पाई है। जिस तरह काम चल रहा है, उससे आशंका है कि साल 2026 में भी इन गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाएगी।
गांवों में शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना धरातल पर उतरने से पहले दम तोड़ गई। रही है। कुल 1561 गांवों 850 गांवों में पानी की आपूर्ति किए जाने का दावा किया जा रहा है। शेष 711 गांवों में पानी की आपूर्ति का लोग इंतजार कर रहे हैं। ज्यादातर पानी की टंकियों पर पंप ऑपरेटर की तैनाती नहीं हो पाई है।
ऐसे में जल जीवन मिशन योजना का मुख्य उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। खास बात ये भी है कि योजना का कार्य 2024 तक पूरा हो जाना चाहिए था। बावजूद करीब आधे गांवों तक पानी की आपूर्ति होने में अभी और समय लगने की बात कही जा रही है। गांवों के लोगों को मजबूरन दूषित पानी पीना पड़ रहा है। समस्या ये भी है कि गांवों में हैंडपंप खराब पड़े हैं।
ग्राम पंचायतों के माध्यम से हैंडपंपों को नहीं बनवाया जा रहा है। लोगों को उम्मीद थी कि जलजीवन मिशन योजना के जरिये पानी की कमी दूर हो पाएगी, लेकिन यह योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है।
तीन हजार करोड़ की है योजना
जिले के 1561 गांवों में जलजीवन मिशन योजना के तहत कुल तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। अब तक 1500 करोड़ रुपये खर्च हो गए हैं। इसके बावजूद लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। विभाग के पास बजट की कमी भी नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जलजीवन मिशन योजना का कार्य अब तक पूरा न होने के पीछे किसकी लापरवाही है।
जलजीवन मिशन योजना के तहत 850 गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू करा दी गई है। शेष गांवों में इस सीजन में पानी की आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी। अधूरी पड़ी पानी की टंकियों और पंप हाउस का निर्माण कार्य तेजी के साथ कराया जा रहा है।
- शफीकुर्रहमान, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण