यह किट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड रहेगी, जिसके जरिए वाहनों की सेहत जांची जाएगी। सबकुछ सही रहा तो अगले माह तक यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। नई व्यवस्था उन वाहन मालिकों के लिए परेशानी का सबब होगी, जो सेटिंग-गेटिंग से वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल कर लेते थे। यही नहीं फिटनेस के लिए हर हाल में गाड़ी को भी विभागीय कार्यालय ले जाना जरूरी होगा।
एआरटीओ कार्यालय में हर साल व्यवसायिक वाहनों की फिटनेस जांची जाती है। मौजूदा समय की बात करें तो संभागीय निरीक्षक (आरआई) की ओर से भौतिक रूप से वाहनों में इंडीकेटर लगा है कि नहीं, इंजन ठीक है कि नहीं आदि फिटनेस जांच करके उसका प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। वैसे तो नियम है कि वाहनों को भी कार्यालय ले जाया है, लेकिन जुगाड़ के चलते बिना वाहन ले जाए ही फिटनेस जारी कर दी जाती थी।
अब एआरटीओ कार्यालय में अरसे से चली आ रही ये व्यवस्था बदलने वाली है। 13.83 लाख रुपये से फिटनेस किट तैयार कराई जा रही है। विभागीय अफसरों की मानें तो फिटनेस किट पूरी तरह से कंप्यूटराज्ड रहेगी। फिटनेस जांच के लिए अब वाहन एआरटीओ कार्यालय ले जाना ही होगा। इसके बिना फिटनेस जांच नहीं हो पाएगी। यानि जुगाड़ लगाकर फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल कर पाना अब वाहन मालिकों के लिए आसान नहीं होगा।
यहां पर हैं 30 हजार व्यवसायिक वाहन
जिले में 30 हजार व्यवसायिक वाहन हैं। इसमें ट्रक, बस, टेम्पो, स्कूली बसें समेत अन्य वाहन शामिल हैं। हर साल इन गाड़ियों के वाहन मालिकों को फिटनेस के लिए एआरटीओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। खटारा वाहनों को सड़कों पर दौड़ाए जाने के चलते आए दिन सड़क दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। नई व्यवस्था के तहत खटारा वाहनों के सड़कों पर दौड़ने पर अंकुश भी लगेगा। यदि ऐसा होगा तो सड़क हादसों में कमी भी आ सकेगी।
जल्द शुरू होगी नई व्यवस्था
अभी तक वाहनों की फिटनेस भौतिक रूप से कर ली जाती थी, लेकिन अब इसके लिए फिटनेस किट तैयार कराई जा रही है। यह पूरा कंप्यूटराज्ड रहेगा। इसमें वाहन मालिक अफसरों को गुमराह नहीं कर पाएंगे। यदि इंजन खराब है, गाड़ी खटारा है, इंडीकेटर नहीं लगा है, इसकी पूरी जानकारी हो जाएगी। यदि ऐसा पाया गया तो फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। नई व्यवस्था को जल्द ही लागू करा दिया जाएगा। इसके लिए 13.83 लाख रुपये का बजट मिला है।
-सुभाषचंद्र कुशवाहा, एआरटीओ प्रशासन