दंपती बच्चे चुराने का करते थे काम, लेते थे आधा पैसा
पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपियों का एक संगठित गिरोह है। यह लोग अस्पतालों, गांवों और कस्बों में कार्य करने वाली आशा बहुओं तथा अन्य व्यक्तियों के माध्यम से ऐसी जानकारी प्राप्त करते थे, जिन्हें संतान की आवश्यकता होती थी।
इसके बाद ब्रम्हपाल के क्लीनिक में कार्य करने वाले सुमित कुमार एवं किरणजीत कौर की ओर से रामकुमार दास एवं उसकी पत्नी रेशमा को नवजात बच्चे उपलब्ध के लिए कहा जाता था।
रामकुमार, उसकी पत्नी रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अकेली महिलाओं को चिन्हित करते थे, जिनके पास नवजात बच्चे होते थे। मौका पाकर यह लोग जान पहचान बढ़ाकर उनके बच्चों का अपहरण करा लेते थे। खास बात ये है कि चोरी किया गया बच्चा बिकने पर दंपती आधा पैसा लेते थे। शेष पैसे में अन्य लोगों को हिस्सा मिलता था।
तीन प्रांतों में सक्रिय था गिरोह
पुलिस की जांच में पता चला है कि बच्चा चोरी करने वाला यह गिरोह, बिहार, उत्तराखंड और यूपी में लगभग सात-आठ माह से सक्रिय था। गिरोह के सदस्यों की ओर से अब तक सात बच्चों के चुराने की बात सामने आई है। इसमें एक बच्चा बरामद हुआ है। शेष छह बच्चे चोरी करके कहां बेचे गए, इस बारे में पुलिस जानकारी कर रही है। एसपी ने गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये इनाम दिए जाने की बात कही है।