रायबरेली। डेढ़ साल बाद भी जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच शुरू नहीं हो सकी है। गर्भवती महिलाओं को पांच से लेकर आठ सौ रुपये खर्च करके जांच करवानी पड़ रही है। कई बार पत्र लिखे जाने के बाद भी शासन से महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो पाई।
जिला महिला अस्पताल के सोनोलॉजिस्ट डॉ. राजीव दीक्षित का तबादला जुलाई 2019 में हो गया था। इसके बाद महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बंद हो गई है। अब तक चिकित्सक न आने से जांच शुरू नहीं हो पाई है। इसके अलावा जिले की सीएचसी में आने वाली गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
हालांकि सीएचसी में मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन सोनोलॉजिस्ट न होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। हालांकि इसके लिए कई बार पत्र भी भेजा गया, लेकिन अब तक सोनोलॉजिस्ट या रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था नहीं कराई जा सकी है।
गर्भावस्था में गर्भ की स्थिति की जांच अल्ट्रासाउंड से ही हो सकती है। इस जांच के बाद अच्छे तरीके से गर्भ की देखभाल की जा सकती है। जांच की सुविधा बंद होने के कारण गर्भवती महिलाओं को मजबूरन पांच सौ रुपये से लेकर आठ सौ रुपये तक खर्च करके जांच करानी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालक जांच के नाम पर वसूली कर रहे हैं।
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेनू चौधरी ने बताया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए सोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। चिकित्सक न होने के कारण जांच प्रभावित है। सोनोलॉजिस्ट के आते ही जांच शुरू कराई जाएगी।