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ऑक्सीजन की कमी से दो मरीजों की मौत, सीएमएस पर कार्रवाई की संस्तुति

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टार्च और मोबाइल की रोशनी में रोगियों का इलाज करते डॉक्टर। - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। जिला अस्पताल में मंगलवार रात बिजली गुल होने से वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई एकाएक ठप हो गई। इस दौरान ऑक्सीजन न मिलने से दो मरीजाें ने दम तोड़ दिया। इनमें से एक मरीज को कंसंट्रेटर की मदद से ऑक्सीजन दी जा रही थी। करीब पांच घंटे तक वार्डों में भर्ती मरीज तड़पते रहे।
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उधर, मामले की जानकारी मिलते ही बुधवार को डीएम माला श्रीवास्तव ने अधिकारियों के साथ जिला अस्पताल पहुंच कर मामले की जांच की। लोगों के बयान दर्ज किए।
जांच में एक मरीज को ऑक्सीजन लगाने के लिए चिकित्सक की ओर से सलाह दिए जाने की पुष्टि हुई है। जांच में सीएमएस नीता साहू की लापरवाही प्रकाश में आने के बाद डीएम ने उनके खिलाफ कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच के लिए शासन से संस्तुति कर दी है।
जिला अस्पताल में मंगलवार को पूरे गौतमन भदोखर निवासी गुप्तार सिंह (72) और अमेठी जिले के फुरसतगंज निवासी रामफेर (50) को भर्ती कराया गया था।
दोनों मरीज वार्ड नंबर तीन में भर्ती थे। मंगलवार रात पांच घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में बिजली गुल रही। अस्पताल प्रशासन ने जेनरेटर तक नहीं चलाया।
रातभर मरीज गर्मी में बेहाल रहे। मोबाइल और टार्च की रोशनी के सहारे वार्डों में रोगियों ने रात काटी। इससे अफरातफरी का माहौल रहा। इसी दौरान ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने से मरीजों की मौत हो गई।
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मामले ने तूल पकड़ा तो बुधवार सुबह डीएम ने जिला जिला अस्पताल पहुंचकर जांच की। साथ ही सीएमओ व सिटी मजिस्ट्रेट सेे अलग-अलग जांच रिपोर्ट तलब की।
देर शाम जांच रिपोर्ट आने के बाद जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीता साहू की लापरवाही और स्टाफ व मरीजों से अभद्र व्यवहार किए जाने की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति कर दी।
सीएमओ की जांच में पाया गया है कि मरीज गुप्तार सिंह को ऑक्सीजन लगाने के लिए चिकित्सक ने सलाह दी थी। हालत गंभीर होने के कारण उसे लखनऊ रेफर किया गया था, लेकिन परिजन मरीज को लखनऊ लेकर नहीं ले गए। अस्पताल में ही भर्ती करके इलाज शुरू किया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई।
मरीज को कंसंट्रेटर पर रखा, बिजली जाते ही ऑक्सीजन बंद
जिला अस्पताल में भर्ती गुप्तार सिंह को चिकित्सक ने ऑक्सीजन लगाने की सलाह दी थी। मरीज को कंसंट्रेटर के माध्यम से ऑक्सीजन देने का प्रयास किया गया। जब तक अस्पताल में बिजली थी, तब तक कंसंट्रेटर से मरीज को ऑक्सीजन मिली, लेकिन बिजली जाते ही कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन मिलनी बंद हो गई। इस वजह से मरीज ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने सिलिंडर या अन्य साधनों से मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना उचित नहीं समझा।
जांच में स्टाफ ने भी सीएमएस पर जड़े आरोप
जांच के दौरान जिला अस्पताल के स्टाफ ने भी अपने बयान में सीएमएस पर कई आरोप जड़े। अभद्र भाषा के प्रयोग के साथ ही मनमाने तरीके से काम करने के आरोप लगाए। जांच के दौरान कई मरीजों ने भी सीएमएस के खिलाफ बयान दिए।
जिला अस्पताल में दो मरीजों की मौत के मामले की जांच कराई गई। एक मरीज को लखनऊ रेफर किया गया था। चिकित्सक ने उसे ऑक्सीजन लगाने के लिए सलाह दी थी। दूसरे मरीज की मौत सामान्य हुई है। जांच में सीएमएस की लापरवाही और स्टाफ व मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार की पुष्टि होने के बाद उनके खिलाफ शासन से उच्च स्तरीय जांच व कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई है।
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माला श्रीवास्तव, जिलाधिकारी
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