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जीएसटी के विरोध में सड़क पर उतरे व्यापारी

Fri, 30 Jun 2017 11:56 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
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रायबरेली में शुक्रवार को जीएसटी के विरोध में कैपरगंज में बंद दुकानें। - फोटो : अमर उजाला
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जीएसटी के विरोध में शुक्रवार को व्यापारी सड़क पर उतर आए। शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में दुकानें बंद रहीं। अपराह्न एक बजे तक दुकानों के शटर गिरे रहे। इससे प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारी नेताओं ने शहर में जुलूस निकालकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार को खूब कोसा।
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कहा कि, खामियों को दूर किए बिना ही केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू किया है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बंदी की वजह से जिला मुख्यालय खरीदारी करने आए लोगों को निराश लौटना पड़ा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (बग्गा गुट) और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने जीएसटी के विरोध में 30 जून को बंदी का आह्वान किया था।

इसी के चलते शुक्रवार को सुबह से ही बाजार बंदी रही। दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखकर जीएसटी का विरोध जताया। शहर के प्रमुख बाजार घंटाघर, सुपर मार्केट, चौहान मार्केट, विशंभर मार्केट, कैपरगंज समेत अन्य स्थानों पर दुकानों में ताले लटके नजर आए और सन्नाटा पसरा रहा।
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उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (बग्गा गुट) के आह्वान पर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर एक बजे तक कारोबार पूरी तरह ठप रहा। जिलाध्यक्ष बसंत सिंह बग्गा की अगुवाई में व्यापारियों का जुलूस सब्जी मंडी, मालखाना, कैपरगंज, नूर मार्केट, बस अड्डा, कोतवाली रोड, घंटाघर, सुपर मार्केट, यूनियन बैंक चौराहा, हाथी पार्क, कचहरी रोड पर निकला। 
इस दौरान जीएसटी की विसंगतियों के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। महराजगंज में रिंकू जायसवाल, बछरावां में सुनील सागर, गुरुबख्शगंज में लाला गुप्ता, सलोन में मोनू अरोड़ा, संतोष अग्रहरि सहित डलमऊ, ऊंचाहार, उत्तरपारा, गंगागंज, हरचंदपुर, थुलवांसा, भरतगंज, रामगंज, डीह, लालगंज आदि की व्यापा मंडल इकाइयों ने बाजार बंदी को सफल बनाया।

 जिलाध्यक्ष बसंत सिंह बग्गा ने कहा कि, व्यापारियों को अपराधी मानने वाले कानून की धाराओं में संशोधन के लिए सरकार को मजबूर किया जाएगा। जब तक जीएसटी का सरलीकरण नहीं हो जाता, तब तक व्यापारियों का आंदोलन जारी रहेगा।

जिला महामंत्री जावेद अहमद खान ने कहा कि, केंद्रीय कर कानून सरकार सहित कांग्रेस, बसपा, सपा सहित अन्य दलों का साझा षड्यंत्र है, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाने की नियत से देशी कारोबारियों पर कानून की तलवार लटकाई गई है और कांग्रेस सहित सभी पूरा विपक्ष सहयोगी की भूमिका निभा रहा है।

बाजार बंदी जुलूस में नगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता, नगर महामंत्री अतुल श्रीवास्तव, जिला प्रभारी टास्क फोर्स मुकेश रस्तोगी, जीसी सिंह, कुलदीप  वर्मा, सुमित गुप्ता, फूलचंद्र,, दिलीप  सिंह, विजय सोनकर, अश्वनी श्रीवास्तव, सुरेश यादव, महेंद्र अग्रहरि, विवेक शुक्ल, लल्लू सिंह, पीके यादव आदि मौजूद रहे।

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं श्याम बिहारी मिश्र के आह्वान पर जिले में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं। मंडल जिलाध्यक्ष आशीष द्विवेदी ने व्यापारियों के साथ जुलूस निकालकर विरोध जताया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि, हमारी एकता ही हमारी पहचान है।

जीएसटी के वर्तमान प्रारूप में खामियों के विरोध में प्रदर्शन कर व्यापारियों ने प्रतिष्ठानों को बंद कर सरकार की व्यापार विरोधी नीतियों के खिलाफ  आक्रोश जताया। इस दौरान जिला महामंत्री जितेंद्र सिंह, नगर अध्यक्ष सतीश वर्मा, अब्दुल वाहिद घोसी, शत्रोहन सोनकर, अखिलेश श्रीवास्तव, मो. अहमद, सोम प्रकाश अग्रहरि आदि मौजूद रहे।

बंदी के आह्वान के बावजूद शहर और देहात क्षेत्रों में कई स्थानों पर दुकानें खुली नजर आईं। इन दुकानों पर रोज की तरह लोग खरीदारी करते नजर आए। हालांकि, व्यापारी नेताओं का दावा है कि बंदी पूरी तरह से सफल रही। उधर, उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश रायबरेली जीएसटी के विरोध में शामिल नहीं हुआ और उसने बंदी का बहिष्कार किया।

जिले में शनिवार से जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू हो जाएगा। इससे क्या फायदे होंगे और क्या नुकसान, इसको लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी है। हर कोई जीएसटी को लेकर ही चर्चा कर रहा है। जीएसटी को लेकर हर किसी की अलग-अलग राय है। ‘अमर उजाला’ ने कुछ व्यापारियों और गृहणियों से बात की तो किसी ने इस पर खुशी जताई तो किसी ने नाराजगी जाहिर की। पेश है रिपोर्ट :

व्यापारी नेता जावेद अहमद का कहना है कि, शासकों की संवेदन शून्यता ने कफन में इस्तेमाल होने वाली मार्किन और लंकलाट को भी जीएसटी के दायरे में रख लिया, जिसे अलग रखना चाहिए था। वहीं, ब्रांडेड खाद्य पदार्थों पर अधिकारी भी कुछ बताने में असमर्थ हैं। कपड़ा व्यापार को कर मुक्त रखने समेत 50 से अधिक खामियों को दूर करना चाहिए था।

व्यापारी नेता पंकज मुरारका का कहना है कि, जीएसटी को लेकर बेवजह भ्रम फैलाया जा रहा है। यदि व्यापारी कारोबार कर रहे हैं तो जरूरी है कि टैक्स भी दें। अब व्यापारियों को टैक्स देना ही पड़ेगा। वे टैक्स चोरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए जीएसटी का विरोध करने पर उतारू हैं। इसके लागू होने   से गरीब जनता को कोई दिक्कत     नहीं आएगी।

व्यापारी फिरोज नूरी का कहना है कि, व्यवसायी वर्ग जागरूक हो चुका है। आने वाले समय में उक्त कानून में अगर कुछ विसंगतियां आती हैं तो हमारा संगठन प्रदेश सरकार से मिलकर उन्हें दूर कराने का प्रयास करेगा। जीएसटी लागू होेने से गरीब जनता को फायदा मिलेगा। कई सामान सस्ते मिलेेंगे। कुछ लोग बेवजह गलत अफवाह फैला रहे हैं।

सुरेंद्र वर्मा का कहना है कि, जीएसटी व्यापारी और गरीब जनता के हित में है। केंद्र सरकार का ये फैसला सराहनीय है। अधिकतर व्यापारी टैक्स जमा नहीं कर रहे थे। जीएसटी लागू होने से उन्हें टैक्स देना पड़ेगा। इसी वजह से वे विरोध पर उतारू हैं। इसके लागू होने से गरीब जनता को फायदा होगा। कोई नुकसान नहीं है।

कपड़ा व्यापारी गुरजीत सिंह तनेजा का कहना है कि, हम जीएसटी का स्वागत करते हैं, मगर मौजूदा मसौदा कपड़ा व्यवसाय के समक्ष संकट उत्पन्न करेगा। कपड़ा व्यापारी के सामने रोजी-रोटी का संकट आने वाला है। अत: जीएसटी का सरलीकरण होना चाहिए। ताकि किसी को भी इससे कोई परेशानी न हो।

व्यापारी नेता जीसी सिंह का कहना है कि, जीएसटी बिना तैयारी के हड़बड़ी के साथ लागू किया जा रहा है। यूपी में मंडी शुल्क अलग से लिया जाएगा, जबकि पूरे देश में कहीं भी मंडी शुल्क नहीं है। इसे हटाना चाहिए। मंडी शुल्क नहीं हटने से अनाज की कीमत बढ़ेगी और व्यापारी को दोहरी लिखापढ़ी करनी होगी। इसे परेशानी का निदान करना चाहिए।

ग्रहणी मीना देवी का कहना है कि, केंद्र सरकार से लागू किया जा रहा जीएसटी ठीक कदम है। बशर्ते खाने-पीने के सामान के दाम सस्ते होने चाहिए। कहा भी जा रहा है कि दाम में कोई इजाफा नहीं होगा। ऐसे में जीएसटी का कदम ठीक है। इसके बारे में बिना पूरी जानकारी के विरोध करना उचित नहीं है।

ग्रहणी रूपम श्रीवास्तव का कहना है कि, जीएसटी एक अच्छा कदम है, पर कुछ बदलाव एवं प्रचार-प्रसार की जरूरत है, ताकि व्यापारियों के हितों का ध्यान रखा जा सके। जागरूकता से किसी व्यापारी को जीएसटी से असुविधा नहीं होगी। इससे व्यापारी ग्राहक को अच्छी सुविधा व लाभ दे सकेंगे।  

ग्रहणी रीता श्रीवास्तव का कहना है कि, जीएसटी लागू करना ठीक बात है, लेकिन व्यापारी हितों और आम जनता का ध्यान रखा जाए। ऐसा नहीं होगा तो व्यापारियों को नुकसान होगा और वह अच्छे ढंग से ग्राहकों को लाभ नहीं दे पाएंगे। सरकार को जीएसटी को लेकर लोगों की जो भी जिज्ञासाएं हैं, उन्हें दूर करके जो कमियां हैं उन्हें दूर करना चाहिए।
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