सतांव क्षेत्र में बारिश न होने से पीले पड़ते धान के पौधे।
रायबरेली। आषाढ़ माह में बारिश न होने से धान की फसल प्रभावित हो रही है। खेत सूखने लगे हैं और कई जगह दरारें भी दिखाई देने लगी हैं। जिले में इस बार एक लाख 61 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई का लक्ष्य है। अब तक करीब 75 फीसदी रोपाई पूरी हो चुकी है, लेकिन बारिश की कमी से चार लाख किसानों को फसल बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
एक जून से 20 जुलाई तक जिले में 143.0 मिमी औसत बारिश की जरूरत होती है, जबकि इस अवधि में केवल 63.20 मिमी बारिश दर्ज की गई है। आसमान में बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। तेज धूप के कारण तापमान भी बढ़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि 70 फीसदी धान रोपाई पूरी हो चुकी है। किसान नहरों और नलकूपों से सिंचाई कर रहे हैं। उन्होंने बारिश की उम्मीद जताई है।
फसल न सूखने दें
कृषि विज्ञान दरियापुर के वैज्ञानिक डॉ. एके कनौजिया ने बताया कि जल्द बारिश होने की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बारिश होने तक फसलों को सूखने न दें और नियमित सिंचाई करते रहें। नहर व नलकूप से पानी देकर फसल बचाने का प्रयास करें, ताकि मेहनत बर्बाद न हो।
क्या कहते हैं किसान
राही ब्लॉक क्षेत्र में बारिश न होने से किसान परेशान हैं। कलसहा गांव के प्रमोद यादव, सैदनपुर के अशोक कुमार त्रिवेदी और राजीव त्रिवेदी ने बताया कि बारिश से फसल बेहतर होती है। कम बारिश से धान सूखने की आशंका है और सिंचाई का खर्च बढ़ गया है। हरचंदपुर ब्लॉक के सलेमपुर गांव के उमाकांत वाजपेयी और अंकित ने कहा, बारिश नहीं हुई तो रोपाई के बाद धान की फसल बचाना मुश्किल होगा। उत्पादन घटने की भी चिंता है।