लोगों की प्यास बुझाने वाली सई नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। मुंशीगंज स्थित शहीद स्मारक के पास नदी में पूरी तरह से जलकुंभी छाई हुई है।
देखकर लगता ही नहीं कि यहां कोई नदी भी है, बल्कि घास मैदान जैसा नजारा दिखता है। राजघाट के पास सालों से गंदे नाले का पानी नदी में गिराया जा रहा है।
इससे न सिर्फ पानी दूषित हो रहा है, बल्कि जलीय जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में जिलाधिकारी एसपी गंगवार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था।
ताकि कमेटी के सदस्य नदियों की निगरानी करें और इसकी रिपोर्ट डीएम को दें। लेकिन कमेटी के सदस्य अपने कर्तव्यों को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
कागजों पर निरीक्षण और दौरे किए जा रहे हैं। बैठकें करके खानापूरी की जा रही हैं। नदियों में स्वस्थ्य पानी का मानक तय है। मानक के मुताबिक पानी में छह मिलीग्राम प्रतिलीटर घुलनशील ऑक्सीजन होनी चाहिए।
यह मात्रा जलीयजीवों के लिए नुकसानदेह नहीं है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों की माने तो जिले में सई नदी के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा करीब साढ़े छह मिलीग्राम प्रति लीटर है।
यदि हालात न सुधरे तो आने वाले कुछ सालों के बाद सई के पानी में जलीयजीवों की जान पर खतरा बन जाएगा। हरदोई से निकली सई नदी बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के सुदौली से जिले में प्रवेश करती है।
इस नदी से जिले के राही, हरचंदपुर, सतांव, महराजगंज, डीह ब्लॉक क्षेत्रों की करीब 10 हजार एकड़ से अधिक खेतों की सिंचाई होती है। दरीबा, मटिहा, रघुनाथपुर कटैली, सोहलिया समेत अन्य जगहों पर पानी की मोटरें लगी है।
जिससे पानी सई से उठाकर माइनरों में जाता है। इससे किसान सिंचाई करते हैं। महराजगंज के किसान ईश्वरदीन, डीह के विद्यासागर, मटिहा के राम सुमेर, सतांव के भगवानदीन आदि का कहना है कि नदी को साफ सुथरा बनाने पर जोर देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. एसके सिंह का कहना है कि सई नदी में नाला गिरने से पानी दूषित हो रहा है।
नगर पालिका परिषद को कई बार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। नदी में जमी जलकुंभी के बारे में जानकारी नहीं है।
वहीं ईओ, नगर पालिका परिषद पीएन सिंह बोले कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए विभाग के पास बजट नहीं है। प्लांट की स्थापना के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कराया जाएगा। -,