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दूर होगी किल्लत, पहुंची 2600 मीट्रिक टन डीएपी

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रायबरेली। डीएपी की कमी से बेहाल किसानों को अब राहत मिल जाएगी। इसके लिए शुक्रवार को 2600 मीट्रिक टन खाद यहां पहुंच गई।
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खाद को साधन सहकारी समितियों में भिजवाया जा रहा है, ताकि किसानों को जल्द उर्वरक मिल सके। डीएपी के बाद अब यूरिया की किसानों को जरूरत पड़ेगी। इसलिए अब यूरिया की कमी को दूर करते दो रैक की डिमांड की गई है।
जिले में रबी की फसल की बोआई चल रही है, लेकिन डीएपी का संकट किसानों को परेशान कर रहा है। हाल ये है कि साधन सहकारी समितियों में डीएपी न होने के कारण किसानों को बाजारों से महंगे दाम में खाद लेकर गेहूं की बोआई करनी पड़ रही है।
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किसानों की समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने डीएपी की डिमांड की थी। यही वजह रही कि सुबह ही 2600 मीट्रिक टन यहां पहुंच गई। अब खाद को ट्रकों के जरिए जिले की सभी साधन सहकारी समितियों में भिजवाया जा रहा है। शनिवार तक डीएपी समितियों में पहुंच जाएगी और खाद का वितरण कराया जाएगा।
गेहूं की फसल की पहली सिंचाई के बाद यूरिया की जरूरत किसानों को पड़ती है। अधिकारियों का दावा है कि वैसे तो यूरिया की उपलब्धता है, लेकिन डिमांड को देखते हुए दो रैक यूरिया की डिमांड शासन से की गई है। ऐसा होने से किसानों को खाद संकट से परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश ने बताया कि डीएपी खाद यहां पहुंच गई है, जिसे साधन सहकारी समितियों में भिजवाया जा रहा है। अब डीएपी की कमी दूर हो जाएगी। इसके अलावा दो रैक यूरिया की डिमांड की गई है। दो रैक में 5200 मीट्रिक टन यूरिया आती है।
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