रायबरेली। रेलवे ट्रैक पर जिस तरह स्लीपर रखा गया था, उस स्थान पर परियावां माइनर है। इस माइनर की पटरी पर मानव रहित रेलवे क्राॅसिंग हुआ करती थी, जिससे गौरी, नरौली, पूरे नान्हूं समेत 10 से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन होता था। इस रास्ते को रेलवे ने बंद कर दिया है। इसके लिए ट्रैक के दोनों ओर रास्ते पर स्लीपर और पटरी को खंभे की तरह लगा दिया है। अब ट्रैक पर स्लीपर रखने वालों की तलाश तेज कर दी गई है।
इससे साइकिल या पैदल राहगीर कभी-कभी इधर से निकलते हैं। यही वजह है कि यह रास्ता सुनसान हो गया है, जिससे शाम होते ही यहां पर अराजकतत्वों का जमावड़ा लग जाता है। क्षेत्रीय थाने की पुलिस और आरपीएफ भी कभी यहां झांकने नहीं आती है। घटनास्थल पर पान-मसाला और सिगरेट के रैपर भी देखे गए हैं।
जिस जगह से स्लीपर उठाकर रेलवे ट्रैक पर रखा गया था, उस जगह की दबी घास से अंदाजा लगाया गया कि नौचंदी एक्सप्रेस के आने से कुछ देर पहले ही स्लीपर को उठाकर ट्रैक पर रखा गया होगा। स्लीपर काफी भारी होता है, जिसे एक-दो व्यक्ति नहीं उठा सकते हैं। इससे जाहिर है कि कई लोग रहे होंगे।
अराजकतत्व या फिर कोई और, बड़ा सवाल
रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रखकर नौचंदी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश में अराजकतत्वों का हाथ होने की बात कही जा रही है, लेकिन इस घटना के पीछे बड़ी वजह भी हो सकती है। इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है। अक्तूबर-2024 में ऊंचाहार-दरियापुर रेलखंड के लक्ष्मणपुर के पास रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रखा गया था, जिससे मालगाड़ी टकराई थी।
एक साल बीतने को है, लेकिन इस घटना में भी अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। वंदेभारत पर आए दिन पथराव की घटनाएं सामने आती रहती हैं। नौचंदी एक्सप्रेस के साथ हुई घटना के बाद यातायात निरीक्षक, रेल पथ निरीक्षक और रेलवे सुरक्षा बल ने मुआयना कर संयुक्त जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर केस दर्ज करा दिया गया है।