पहले लंबी लाइन में लगाकर पर्चा बनवाना। फिर कम से कम तीन घंटे ओपीडी में डॉक्टर के कक्ष के बाहर खड़े होकर उनके आने का इंतजार करना। डॉक्टर के आने के बाद पहले दिखाने के लिए लाइन में लगे लोगों के धक्के खाना।
इस समस्या से जिला अस्पताल आने वाले हर रोगी को दो-चार होना पड़ता है। इससे राहत के लिए अस्पताल प्रशासन ने जो कदम उठाया है, यदि वह सफल रहा तो इन मुश्किलों से रोगियों को छुटकारा मिल जाएगा।
सीसीटीवी कैमरों की हाईटेक सुरक्षा में रहने वाले जिला अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर को भी हाईटेक बनाने की कवायद शुरू की गई है। अब जिला अस्पताल की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी लखनऊ की तर्ज पर कंप्यूटराइज्ड बनाने के प्रयास शुरू किए गए हैं।
अस्पताल प्रशासन अपने प्रयासों में सफल रहा तो इलाज के लिए आने वाले रोगियों को तमाम मुश्किलों से छुटकारा मिल जाएगा। जिला अस्पताल के पंजीकरण कक्ष में कंप्यूटर लगाया जाएगा। इसी से पर्चे बनाए जाएंगे।
इसके अलावा ओपीडी में बैठने वाले सभी चिकित्सकों के कमरों के बाहर डिस्प्ले स्क्रीन लगेगी। ओपीडी में क्रमवार मरीजों को देखा जाएगा। इतना ही नहीं मरीज का नंबर कितनी देर में आएगा इसका भी उसे पता चल सकेगा। ऐसा होने पर वह निश्चिंत होकर बिना धक्के खाए अपना इलाज करा सकेगा।
जिला अस्पताल के सीएमएस एनके श्रीवास्तव ने बताया कि रजिस्ट्रेशन काउंटर को कंप्यूटराइज्ड बनाने की योजना है। यह सुविधा लखनऊ और नोएडा के सरकारी अस्पतालों में पहले से है। इसके तहत ओपीडी में एक स्क्रीन लगाई जाएगी। इस स्क्रीन पर मरीजों का रजिस्ट्रेशन नंबर आएगा तो उसका इलाज होगा। इस व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है।