रायबरेली। सलोन क्षेत्र के सिरसिरा में निर्माणाधीन ट्रांसमिशन केंद्र में आग लगने से तीन जिले के उपभोक्ताओं की उम्मीदों को झटका लगा है। इस बार भी गर्मी में लोगों को बिजली संकट से जूझना पड़ेगा। सुस्त कार्य के पीछे अभियंताओं की लापरवाही कहे या कमीशनबाजी। पहले चहेती एजेंसी को काम दिया। बाद में उसे डिफाल्टर करना पड़ा।
ट्रांसमिशन केंद्र से रायबरेली के अलावा प्रतापगढ़ और अमेठी जिले के लोगों को बिजली देने का खाका सपा सरकार में तैयार हुआ था। 2017-18 में इसका काम शुरू हुआ। काम शुरू होने पर लोगों में उम्मीद जागी कि अब लोगों को बिजली संकट से जूझना नहीं पड़ेगा। इस केंद्र के बनने से तीनों जिलों में लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिल जाती। गर्मी में मांग इतनी बढ़ जाती है कि उपकेंद्र ओवरलोड हो जाते हैं।
निर्माण शुरू होने के बाद इसमें ग्रहण लग गया। 2020 और 2021 में कोरोना के चलते काम पूरी तरह प्रभावित रहा। इसके बाद काम शुरू तो हुआ, लेकिन अफसरों और स्थानीय ठेकेदारों की खींचतान के चलते काम में तेजी नहीं आई। यही वजह रही कि 2023-24 में एजेंसी बीजीआर को डिफाल्टर करना पड़ा।
भवन निर्माण समेत सिविल का काम कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया के बाद कंट्रोल रूम, भवन बनकर तैयार हो गए। इलेक्ट्राॅनिक का काम शुरू कराया जाता, इसके पहले ट्रांसमिशन केंद्र में आग लग गई। इससे करोड़ों के उपकरण फुंक गए। ट्रांसमिशन से कब बिजली आपूर्ति शुरू हो पाएगी। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
2025 में आपूर्ति शुरू होने की थी उम्मीद
कार्यदायी एजेंसी बीजीआर को 2021-22 में ट्रांसमिशन केंद्र बनाकर तैयार करना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उम्मीद जताई जा रही थी कि 2025 तक इससे बिजली आपूर्ति शुरू हो जाती, लेकिन अग्निकांड के बाद इससे आपूर्ति कब तक शुरू होगी, इसकी जानकारी अभियंताओं को भी नहीं है।
जल्द आपूर्ति शुरू कराने के होंगे प्रयास
अग्निकांड के बाद काम में विलंब होना स्वाभाविक है। पूरा मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। जल्द काम पूरा कराने के साथ आपूर्ति शुरू कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
- पवन कुमार, अधिशासी अभियंता ट्रांसमिशन