रायबरेली में रविवार को सुपर मार्केट में दिवाली खरीदते लोग।
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रायबरेली। आधुनिकता की चकाचौंध में भी मिट्टी के बने दीये सबकी पहली पसंद है। इस बार भी दीपक के उजाले से दिवाली पर अंधेरा दूर होगा। त्योहार के मद्देनजर शहर से लेकर कस्बों तक में दीयों का बाजार सज गया है। लोग खरीदारी करने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं।
दिवाली खुशियों का पर्व है। हर किसी को इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार है। त्योहार की तेजी से तैयारियां घरों पर चल रही हैं। त्योहार पर दीयों पर ही दीपक जलाया जाता है। इसलिए गांवों में कुम्हार दीपक को बनाने का कार्य कर रहे हैं।
बाजारों में भी दीये बिक्री के लिए पहुंच गए हैं। शहर के सुपर मार्केट, कैपरगंज, जिला अस्पताल चौराहा, बस स्टेशन चौराहा व सिविल लाइंस चौराहा पर देहात क्षेत्र के कुम्हार मिट्टी के दीये बनाकर बिक्री के लिए शहर लाए हैं।
जहां पर उनकी खरीदारी के लिए लोग पहुंच रहे हैं। दीयों की खरीदारी करने वालों का कहना है कि मिट्टी के बने दीये ही उनकी पहली पसंद है। इन दीयों के जलाने से ही दिवाली पर अंधेरा दूर होगा।
अमावां की रहने वाली शहजादा बानो सुपर मार्केट में दुकान लगाकर दीयों की बिक्री कर रही हैं। कहती हैं कि हर साल वह दिवाली पर मिट्टी के दीये की बिक्री करती हैं। 10 रुपये में 12 पीस दीयों की कीमत है।
दुकानदार दीपक व राहुल कुमार का कहना है कि आधुनिकता की चकाचौंध में भी मिट्टी से बने दीयों की खरीदारी खूब होती है। त्योहार को देखते हुए दीयों की खरीदारी लोग कर रहे हैं।
शहर के जोशियाना पुल के पास ललई प्रजापति लंबे समय से मिट्टी के दीये बनाने का काम करते हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वज भी मिट्टी के दीये बनाते थे। वह भी त्योहार पर मिट्टी के दीये बनाने का काम करते हैं। समय चाहे जितना बदला हो, लेकिन आज भी लोग दिवाली पर मिट्टी के दीये जरूर खरीदते हैं।