पैसों की लालच में महिला की बच्चेदानी काटने वाले हड्डी के डॉक्टर को शासन ने प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी है। उसकी दो वेतन वृद्धि को भी स्थायी रूप से रोक दिया गया है। ढाई साल तक निलंबित रहे डॉक्टर को सीएमओ सोनभद्र कार्यालय से संबद्ध किया गया था।
वर्तमान में वह जिला अस्पताल में तैनात हैं। वर्ष 2013 में अमावां सीएचसी में अधीक्षक के पद पर तैनात रहे हड्डी के डॉक्टर ने गायनोकॉलिजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) व सर्जन बनकर महिला की बच्चेदानी को काटा था।
तीन अप्रैल 2013 की रात अमावां सीएचसी अधीक्षक डॉ. नीरज शर्मा ने अमेठी जिले के सांगीपुर गांव निवासी रवींद्र की 45 वर्षीय पत्नी श्रीमती का ऑपरेशन करके उसकी बच्चेदानी को काट दिया था। डॉ. शर्मा हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन उन्होंने गॉयनिकल सर्जरी कर डाली थी।
महिला की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार अप्रैल 2014 की सुबह चार बजे मेडिकल कॉलेज के क्वीन मेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। क्वीन मेरी की हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. विनीता दास के पत्र पर परिवार कल्याण के महानिदेशक ने मामले की जांच के आदेश दे दिए थे। चिकित्सक के इस करतूत को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई थी।
डीजी के आदेश पर जिला स्तर पर तत्कालीन एसीएमओ डॉ. वीरेंद्र मोहन, सीएमएस जिला महिला अस्पताल डॉ. रेनू चौधरी, एसीएमओ डॉ. संदीप गुलाटी, फिजीशियन डॉ. राजीव तिवारी व सर्जन डॉ. सतीश चंद्र लाभियान की टीम ने जांच की थी। शासन ने भी अपर निदेशक को मामले की जांच सौपी थी।