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निशक्तता को दी मात, बने दूसरों का भी सहारा

Fri, 02 Dec 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रायबरेली
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विश्व विकलांग दिवस शनिवार को है। इस मौके पर कई आयोजन होंगे और दिव्यांगों की दिक्कतों और सुविधाओं की चर्चा होगी। जिले में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने निशक्तता को मात दी। - फोटो : अमर उजाला
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विश्व विकलांग दिवस शनिवार को है। इस मौके पर कई आयोजन होंगे और दिव्यांगों की दिक्कतों और सुविधाओं की चर्चा होगी। जिले में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने निशक्तता को मात दी। अपनी काबलियत से अपने पैरों में खड़े हुए। कुछ निशक्तजन अपने साथ दूसरों का भी सहारा बनकर समाज को आईना दिखा रहे हैं।
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कोई टेलरिंग तो कोई शिक्षामित्र बनने तक का सफर तय किया है। यही नहीं दिव्यांग सभासद का चुनाव जीतने तक में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमर उजाला ने विश्व विकलांग दिवस के मद्देनजर कुछ ऐसे ही दिव्यांगों से बात की, जिन्होंने निशक्तता को मात दी और दूसरों का सहारा बन रहे हैं।

टेलरिंग को बनाया जीवन का सहारा, दूसरों को दिया रोजगार
शहर के इंदिरा नगर की रहने वाली सुमन अवस्थी की तरक्की में दिव्यांगता बाधा नहीं बन पाई। बचपन से ही चलने में दिक्कत थी। इससे सुमन कई बार निराश हो जाती, लेकिन हौसले को भी टूटने नहीं दिया। स्नातक तक पढ़ाई की। इसके बाद टेलरिंग को अपना जीवन बनाने के लिए कदम बढ़ाया। खुद टेलरिंग का कार्य सीखकर इंदिरा नगर में ही दुकान खोली। कभी मायूस रहने वाली सुमन आज तरक्की के शिखर पर हैं। अपनी दुकान में स्वयं के साथ आठ महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। सुमन कहती हैं कि दिव्यांगता से दिक्कत तो होती है, लेकिन इससे लोगों को निराश नहीं होना चाहिए। हमेशा कुछ कर गुजरने की तमन्ना रहनी चाहिए, तभी मंजिल मिल पाती है।
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दोनों हाथ कटे, पर शिक्षिका बन संवार रही बच्चों का भविष्य
सलोन। तहसील क्षेत्र की रहने वाली धरई रिजवाना बानो आज जिले के लोगों के लिए एक मिशाल हैं। दोनों हाथ कटे होने के बाद भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। पहले गांव के प्राथमिक स्कूल में शिक्षामित्र बनी और उसी स्कूल में शिक्षिका हो गई हैं। शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रिजवाना को राष्ट्रपति से पुरस्कार भी मिल चुका है।

रिजवाना कहती हैं कि इंसान को हिम्मत नहीं हारना चाहिए। मेहनत करने से तरक्की की मंजिल मिल ही जाती है। स्कूल के बाद वह गांव के बच्चों को घर भी पढ़ाने का कार्य करती हैं, ताकि बच्चे पढ़ लिखकर देश और जिले का नाम रोशन कर सकें।

सभासद का चुनाव जीत दूर कर रहे दूसरों की समस्याएं
छोटी बाजार के रहने वाले आमिर अंसारी के लिए निशक्तता आज कोई मायने नहीं रखती। अपनी मेहनत के बदौलत उन्होंने आज सभासद व सफल अधिवक्ता तक का मुकाम हासिल किया है। आमिर कहते हैं कि जब दो साल के थे, तभी उनको तेज बुखार आया था। पोलियो वायरस के संक्रमण से पैर में दिक्कत हो गई।

हालांकि माता-पिता ने अपनी आर्थिक क्षमता से ऊपर उठकर उनका इलाज कराया, लेकिन पूरी तरह से निशक्तता दूर नहीं हो पाई है। पर हिम्मत नहीं हारी। स्नातक करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद सिविल कोर्ट में वकालत शुरू की। वकालत करने के साथ ही नगर पालिका वार्ड नंबर 31 से सभासद भी चुना गया। जीविकोपार्जन से जो समय मिलता है, वह उसे दूसरों की सेवा में लगाता हूं।
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