बछरावां (रायबरेली)। विधानसभा चुनाव का शोर हर तरफ सुनाई पड़ रहा है। इन सबके बीच चुनावी मुद्दे भी गूंज रहे हैं। इन्हीं में से एक बछरावां में तहसील बनाए जाने का मुद्दा हावी है, जो दशकों बाद भी अधर में लटका है। क्षेत्रीय लोग इसे साकार होते देखना चाहते हैं, लेकिन हर बार बात नहीं बन पाती। तहसील न होने के कारण लोगों को राजस्व से संबंधित कामकाज के लिए महराजगंज और सदर तहसील जाना पड़ता है। वजह बछरावां कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुछ गांव सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जबकि अन्य गांव महराजगंज तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। चुनाव के दौरान यह मुद्दा फिर गूंज रहा है।
अस्सी के दशक में बछरावां को तहसील का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव भी बना, लेकिन बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। शासन-प्रशासन की उपेक्षा से क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है। लोग कानूनी कार्रवाई पूर्ण कर बछरावां को तहसील बनाए जाने की मांग शासन प्रशासन से कई दशकों से करते आ रहे हैं। लखनऊ-प्रयागराज और बांदा-बहराइच राजमार्ग के साथ-साथ राजधानी की सीमा पर स्थित बछरावां विकासखंड की आबादी करीब 2 लाख 30 हजार से अधिक है। बछरावां कस्बा विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है। बछरावां क्षेत्र के विनायकपुर, पलिया, तमनपुर, कुर्री, रामपुर सुदौली, मैनाहार कटरा, दुंदगढ़ आदि गांवों के लोगों को राजस्व से संबंधित कामकाज के लिए 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बछरावां को तहसील का दर्जा न मिलने के कारण यह टीस लोगों को अखर रही है।
ये सभी संसाधन हैं मौजूद
बछरावां में डाक सेवा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दूरसंचार केंद्र, 132 केवी विद्युत केंद्र, पावर हाउस, नगर पंचायत कार्यालय, फायर स्टेशन, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, मंडी समिति कार्यालय, गैस एजेंसी, कई महाविद्यालय, कई पेट्रोल पंप, कई इंटर कॉलेज, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक के अलावा ग्रामीण इंडोर स्टेडियम आदि संसाधन बछरावां क्षेत्र में स्थापित हैं।
तहसील बनाने के लिए दो बार हो चुका है प्रयास
अस्सी के दशक में राजस्व मंत्री रहे बैजनाथ कुरील के कार्यकाल में बछरावां को तहसील बनाए जाने का प्रस्ताव बना था। इसमें बछरावां में तहसील स्थापित करके महराजगंज स्थित तहसील भवन में राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना करने का प्रस्ताव बना था। महराजगंज क्षेत्रवासियों के विरोध के बाद कार्रवाई शून्य हो गई थी। एक दशक पूर्व बसपा सरकार में रायबरेली में तैनात रहे जिलाधिकारी रामअचल वर्मा के कार्यकाल में बछरावां को तहसील बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। किन्हीं कारणों से वित्त आयोग की बैठक में बछरांवा को तहसील बनाए जाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
आरपार की होगी लड़ाई
ग्रामीण चंद्रमणि त्रिपाठी, राकेश चौधरी, रामशरण यादव, सत्यप्रकाश चौधरी, शशिकांत मिश्रा, साकेत त्रिपाठी, विनोद, पिंकू मिश्रा कहते हैं कि शासन-प्रशासन स्तर पर किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा पैरवी न किए जाने से बछरावां का तहसील बनने का मामला परवान नहीं चढ़ पा रहा है। बछरावां को तहसील बनाए जाने के लिए विधानसभा चुनाव के बाद आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। चुनाव में जो उनकी इस मांग को पूरी करेगा, उसी का इस बार सपोर्ट किया जाएगा।