खीरों थाना क्षेत्र में शनिवार को इलाज के अभाव में एक किशोरी की मौत हो गई। एंबुलेंस न पहुंचने से परिवारीजनों और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। सभी ने डॉक्टरों के खिलाफ नारेबाजी करके जमकर हंगामा किया।
यही नहीं ठीक से इलाज न किए जाने पर डॉक्टरों से काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। किशोरी खाना बनाते समय झुलस गई थी और बिना इलाज के दो घंटे तक तड़पती रही।
एंबुलेंस न पहुंचने पर उसे जिला अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत कराया।
खीरों के हिमाचलखेड़ा मजरे बरौंडी की निशा (16) पुत्री रामखेलावन कुरील को छह माह पहले फालिज गिर गई थी। इस कारण उसका आधा अंग काम नहीं कर रहा था।
निशा की मां कमला देवी के मुताबिक, शनिवार सुबह वह बकरी चराने गई थी। घर पर कोई नहीं था। इसी दौरान निशा चूल्हे पर खाना बना रही थी।
आधे अंग से अपंग होने के कारण वह जलते चूल्हे के ऊपर गिर गई और उसके कपड़ों में आग लग गई। घर में अकेले होने के कारण वह जलती रही और गंभीर रूप से झुलस कर बेहोश होकर आंगन में गिर गई।
मां बकरी चराकर घर लौटी तो बेटी की हालत देख दंग रह गई। शोर मचाने पर पड़ोसी आ गए और किशोरी को सीएचसी लाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
उसका ठीक तरीके से इलाज नहीं किया गया। परिवारीजनों ने एंबुलेंस के लिए 108 नंबर पर फोन किया। बस इतना जवाब मिलता रहा कि गाड़ी रास्ते में है। होते करते दो घंटे बीत गए, लेकिन गाड़ी नहीं पहुंची।
इधर निशा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इससे नाराज परिवारीजनों और ग्रामीणों ने सीएचसी में हंगामा करना शुरू कर दिया। सभी का कहना था कि इलाज किए बिना ही रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस नहीं पहुंची।
सीएचसी के डॉक्टरों के साथ तीखी नोकझोंक हुई। करीब आधा घंटे तक सीएचसी में बवाल होता रहा। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और मामला शांत कराया।
एसओ आरके शर्मा का कहना है कि सूचना मिलने पर पुलिस भेजकर मामला शांत करा दिया गया। उधर, किशोरी की मौत से परिवारीजनों में कोहराम मच गया।