लता ओट तब सखिन्ह लखाए, श्यामल गौर किशोर... गाने के साथ ही सीता से सखियों ने दोनों भाइयों के रुप की प्रशंसा की। कहा कि देखो सखी इन सुकुमारों को।
सीता ने जब राम को देखा, तो सब कुछ भुला बैठी। यह देख सखियां सीता को छेड़ने लगती हैं। इससे पहले वन में राम और लक्ष्मण ने यज्ञ में बाधा डालने आ रहे राक्षसों का वध किया।
राक्षसी ताड़िका की गर्जना से ऋषि भयभीत हो जाते हैं। इस पर दोनों भाइयों ने पराक्रम का परिचय देते हुए ताड़का का वध किया। श्रीदीपमालिके सांस्कृतिक समिति पाहो के कलाकारों का मंचन देखने के लिए देर रात तक लोग जमे रहे।
लीला अध्यक्ष श्यामनाथ सिंह, संरक्षक गंगा बक्स सिंह, लल्लन त्रिवेदी ने अहम भूमिका निभाई। अमित ने सीता, आकाश ने राम, शिवम ने लक्ष्मण, मुन्नूलाल ने विश्वामित्र और राजू ने ताड़का के किरदार में सभी को आकर्षित किया।
खालीसहट में कलाकारों ने विश्वामित्र आगमन ओर ताड़का वध का मंचन किया। दशरथ के दरबार में जब विश्वामित्र पहुंचते है, तो जोरदार स्वागत होता है।
दशरथ ने आगमन का कारण पूछा तो विश्वामित्र ने असुरों के यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने की बात कही। राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए मांगा।
इस पर दशरथ यह कहकर मना कर देते है कि अयोध्या की पूरी सेना ले लीजिए। अभी तो दोनों छोटे हैं। गुरु वशिष्ठ के समझाने के बाद राम और लक्ष्मण को भेजने के लिए सहमत होते हैं।
इस मंचन के दौरान कई बार कलाकारों ने इतना बढ़िया मंचन किया कि लोगों की आंखें नम हो गईं। इस मौके पर विनोद सोनकर, निरंकार शुक्ल, दिव्श्यम, जगमोहन, मनमोहन मौजूद रहे।