रायबरेली। जिले में बिक रही आइसक्रीम की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। विधि विश्लेषक प्रयोगशाला की जांच में आइसक्रीम के छह नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें सिंथेटिक कलर मिलने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित निर्माताओं और विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। एसीजेएम कोर्ट में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इसी वर्ष अलग-अलग तारीखों में आइसक्रीम के नमूने लिए थे। शहर के घंटाघर स्थित सोमेश सावलानी की दुकान से ज्ञानी आइसक्रीम, डलमऊ में राजू की दुकान से दुर्गा आइसक्रीम, ऊंचाहार में मनीष की दुकान से सैनिक आइसक्रीम, सलोन में चंद्रशेखर की दुकान से आइसकैंडी और फुरसतगंज स्थित शिव प्रकाश की दुकान से आइसक्रीम फ्लेवर का नमूना लिया गया था।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इन पांचों नमूनों को असुरक्षित पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार इनमें सिंथेटिक कलर आदि की मौजूदगी मिली है। इसके अलावा उन्नाव में निर्मित अंकित आइसक्रीम का नमूना अवमानक घोषित किया गया है। सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय मानिक चंद्र सिंह ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने अलग-अलग स्थानों से आइसक्रीम के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। जांच में पांच नमूने असुरक्षित और एक अवमानक पाया गया। संबंधित कारोबारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सभी के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा कराया जाएगा।
राधे स्वीट्स की मीठी चीनी में मिला सिंथेटिक कलर
पिछली होली में गुरुबख्शगंज स्थित राधे स्वीट्स से मीठी चीनी का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में नमूना असुरक्षित और अवमानक पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार इसमें सिंथेटिक कलर मिला था। रिपोर्ट आने के बाद दुकान संचालक के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।