रायबरेली। शहर से लगभग 13 किमी दूर रायबरेली-प्रतापगढ़ मार्ग पर छोटा सा गांव है पंडित की कुटी, जहां रहने वाले सूबेदार के जांबाज बेटे ने फाइटर पायलट बनकर पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। यह वही परिवार है जिससे कई लोग सेना में भर्ती हुए और देश की रक्षा करने में योगदान दिया। होनहार बेटे के फाइटर पायलट बनने से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवारीजनों को बधाई देने वालों का तांता लग गया। मिठाई खाने और खिलाने का दौर चला। दूसरी तरफ लखनऊ में रह रहे माता-पिता और बहन को भी बधाई देने का सिलसिला चलता रहा।
शहर से सलोन तहसील क्षेत्र जाने वाले मार्ग पर मेजरगंज के पास सेमरा ग्रामसभा का छोटा सा मजरा है पंडित का पुरवा। इस गांव में जन्मे, पले-बढ़े हरीश तिवारी इस समय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 1991 से सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हरीश इस समय लखनऊ में तैनात हैं और कैंट में रह रहे हैं। उनके जांबाज बेटे हिमांशु ने एयरफोर्स अकादमी हैदराबाद में शनिवार को हुई पासिंग आउट परेड में फाइटर पायलट बनकर जिले का नाम रोशन किया।
वह जिले के पहले व्यक्ति हैं जो एयरफोर्स में फाइटर पायलट बने हैं। अपने पहले प्रयास में ही सारे टेस्ट पास करने वाले हिमांशु ने तीन साल राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया फिर एयरफोर्स अकादमी हैदराबाद में पायलट की ट्रेनिंग की। पासिंग आउट परेड में वायु सेना अध्यक्ष ने उन्हें रैंक पहनाया।
हिमांशु के पिता हरीश तिवारी खुद आर्मी में हैं। जहां-जहां पिता की पोस्टिंग रहीं, वहां-वहां हिमांशु भी साथ-साथ रहा। पिता ने बताया कि ऊधमपुर में पोस्टिंग के दौरान हिमांशु का जन्म हुआ। इसके बाद जहां-जहां तैनाती होती रही, वहीं के आर्मी स्कूल में हिमांशु की पढ़ाई भी चलती रही। हिमांशु ने आर्मी स्कूल मेरठ से दसवीं और आर्मी स्कूल पटियाला से बारहवीं की परीक्षा पास की।
पढ़ाई के साथ वह स्पोर्ट्स में भी अव्वल रहा। मां रेखा तिवारी गृहणी हैं तो छोटी बहन आयुषी 12वीं में पढ़ती है। यह परिवार भले ही वर्तमान में लखनऊ के कैंट में रह रहा है लेकिन पंडित की कुटी गांव में आना-जाना लगा रहता है। गांव में ही पैतृक आवास है तो अन्य परिवारीजन भी यहीं रहते हैं। इस परिवार के लोगों का सेना में जाने की परंपरा रही है। पंडित की कुटी गांव में इस समय खुशी का माहौल है।