जिले के सहकारी बैंकों में दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रही। सभी 54 सहकारी बैंक शाखाओं में ताले नहीं खुले ग्राहकों को निराश लौटना पड़ा। सहकारी बैंक स्टाफ एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की जिला शाखा ने हड़ताल में पूरी तरह से भाग लिया।
बैंक कर्मचारियों ने कहा कि अन्य बैंक के ग्राहकों की तरह सहकारी बैंक में अमान्य किए गए 500 रुपए के नोट जमा करने का अधिकार दिया जाय। इसके अलावा प्रदेश भर के सहकारी बैंकों को पर्याप्त कैश देकर कैश कमी की समस्या से उबारा जाय। रबी सीजन में सहकारिता से जुड़े किसानों को धन न उपलब्ध होने की बड़ी समस्या से जूझना पड़ रहा है।
सहकारी बैंक की मुख्यशाखा परिसर में शुक्रवार को जिले भर के सहकारी बैंक कर्मचारी व अधिकारी एकत्र हुए। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय संगठन आल इंडिया कोआपरेटिव बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ने 14 नवंबर को पत्र भेजकर जिला सहकारी बैंकों को पुराने 500 व 1000 रुपए के नोट जमा करने का अधिकार देने की मांग की थी लेकिन अब तक प्रकरण में कोई निर्णय नहीं लिया गया
इससे सहकारी बैंकों के करोड़ों किसान व बैंक ग्राहक परेशान हो रहे हैं और सहकारी बैंकों की छवि धूमिल हो रही है। संगमलाल मौर्या ने कहा कि सहकारी बैंक सामान्य जन के मित्र है। सहकारी बैंक किसानों, छोटे कास्तकारों, भूमिहीनों मजदूरों की सेवा के लिए लंबे समय से कार्यरत हैं।
संगठन की मांग है कि केंद्र सरकार किसानों व ग्राहकों की परेशानी देखते हुए सहकारी बैंक केा पुराने 500-1000 के नोट जमा करने की अनुमति प्रदान करे। अन्य कर्मचारी नेताओं ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर बलदेव प्रसाद, शैलेंद्र प्रताप , कौशल कुमार, श्यामसुंदर, सरिता श्रीवास्तव, राजेश कुमार, मजगेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।