रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2005 में बनवाए गए विद्यालय भवनों की हालत महज डेढ़ दशक में ही खराब हो गई। तकनीकी समिति ने इन विद्यालयों को जर्जर घोषित कर दिया है। इससे जाहिर होता है कि निर्माण के समय भारी अनियमितता बरती गई।
इसीलिए इन स्कूलों को बनवाने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। इन सभी शिक्षकों का वेतन बाधित करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर प्रशासनिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
वर्ष 2005 में नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे कल्लू का निर्माण इसी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन देवी, छतोह विकास क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय खेरवा का निर्माण उच्च प्राथमिक विद्यालय सिसनी भुवालपुर के प्रधानाध्यापक नंद तिवारी, अमावां विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे दूलम का निर्माण कंपोजिट विद्यालय अमावां की प्रधानाध्यापिका अरुणा मिश्रा, विकास क्षेत्र डीह के प्राथमिक विद्यालय मऊ (मूल भवन) तथा 11 अतिरिक्त कक्ष का निर्माण उच्च प्राथमिक विद्यालय मऊ के सहायक अध्यापक बृजराज, विकास क्षेत्र अमावां के प्राथमिक विद्यालय कोडरा अहिरन का निर्माण कंपोजिट विद्यालय मर्दानपुर के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश सिंह ने कराया था।
बीएसए ने बताया कि इन विद्यालयों के भवनों को तकनीकी समिति जिसमें लोक निर्माण विभाग, लघु सिंचाई तथा ग्रामीण अभियंत्रण के अधिकारी शामिल हैं, ने जर्जर घोषित कर दिया है। इससे जाहिर होता है कि विद्यालय भवन के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई है।
निर्माण कार्य कराने वाले प्रधानाध्यापकों एवं सहायक अध्यापकों का वेतन बाधित करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण संतोषजनक न पाए जाने पर प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित अध्यापक का होगा।