केंद्र सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी जननी सुरक्षा योजना का लाभ जन-जन तक पहुंचाने का दावा तार-तार साबित हो रहा है। योजना में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की ओर से दिलचस्पी नहीं दिखाने के कारण प्रसूताओं के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
यहां तक कि डीएम का फरमान भी अफसरों की निष्क्रियता पर असर नहीं डाल पा रहा है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि देने की चलाई गई योजना प्रसूताओं को मुंह चिढ़ा रही है। वहीं सरकार की मंशा पर अफसर पानी फेरने में लगे हैं। लापरवाही के कारण छह हजार प्रसूताओं का करीब 72 लाख रुपये का भुगतान लटका हुआ है।
इस योजना के तहत जिला अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव कराने पर ग्रामीण अंचल की प्रसूता को 1400 और शहरी क्षेत्र की प्रसूता को एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह धनराशि सीधे प्रसूताओं के खाते में भेजी जाती है।
इस वित्तीय वर्ष 2016-17 में बीते अक्तूबर महीने तक करीब 27 हजार संस्थागत प्रसव जिले में हुए, लेकिन भुगतान करीब 21 हजार प्रसूताओं का किया गया। शेष छह हजार लाभार्थियों को प्रोत्साहन धनराशि नहीं मिल सकी है।
प्रसूताएं और उनके परिवारीजन स्वास्थ्य केंद्र और इकाइयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। यह हाल तब है जब डीएम अनुज कुमार झा ने शत-प्रतिशत लाभार्थियों के खाते में धन भिजवाने के निर्देश दिए हैं।