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सोनिया के ड्रीम प्रोजेक्ट पर ग्रहण, रिंगरोड का निर्माण ठप

रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 08 Feb 2016 12:00 AM IST
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जिले की सांसद सोनिया गांधी के 2.40 अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट रिंगरोड पर ग्रहण लग गया है। इस प्रोजेक्ट को इस साल मार्च तक पूरा हो जाना चाहिए था।
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लेकिन शुरुआत से ही इस कार्य पर अड़चनें आती गई। नतीजतन अब रिंग रोड का कार्य ठप हो गया है। कार्यदायी संस्था का टेंडर भी निरस्त कर दिया गया है।

इसके साथ जिले के जिस विकास का सपना जनता ने देखा था, वह भी चकनाचूर हो गया। केंद्र में कांग्रेस शासनकाल में जिले को कई तोहफे मिले थे। इनमें से एक रिंगरोड भी है।

वर्ष 2013 में इसे केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी। मार्च-2014 में इस भारीभरकम परियोजना को धरातल पर लाने का काम शुरू हुआ। दो चरणों में रिंगरोड बन कर तैयार होना था।

रिंग रोड को मूर्त रूप देने की जिम्मेदार लखनऊ की जेकेएम कंपनी को दी गई थी। शुरुआती दौर से ही निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ सकी।

कभी रंगदारी के फेर में योजना फंसी तो कभी मेहनताना न मिलने पर कंपनी के श्रमिकों ने आंदोलन किया। रंगदारी के मामले तो थाने तक पहुंचे। करीब एक दर्जन मुकदमे भी दर्ज हुए।

इन अड़चनों ने अरबों के प्रोजेक्ट की लुटिया डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिरकार नंवबर 2015 में काम पूरी तरह से ठप हो गया।

इस प्रोजेक्ट को मार्च-2016 में पूरा होना था, लेकिन दो साल में महज आठ फीसदी काम ही हो सका है। अब तक प्रोजेक्ट पर करीब 6.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

जिला मुख्यालय से होकर गुजरे सभी हाईवे को यह रिंगरोड आपस में जोड़ेगी। इससे बिना शहर में प्रवेश किए एक हाईवे से दूसरे हाईवे पर पहुंचा जा सकेगा।

लखनऊ-इलाहाबाद एनएच पर डिडौली और मोहम्मदपुर कुचरिया, रायबरेली-बांदा एनएच पर दरीबा गांव के पास रिंगरोड और एनएच आपस में मिलेंगे।

इसके अलावा रायबरेली-जौनपुर और टांडा हाईवे को भी इससे जोड़ा जाएगा। यही नहीं रायबरेली-डलमऊ मार्ग पर सुलियापुर के पास से रिंगरोड पर पहुंचा जा सकेगा।

फिलहाल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जेकेएम कंपनी का टेडर निरस्त कर दिया है। अब देखना यह है कि मंत्रालय परियोजना के हित में कौन सा कदम उठाता है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय पीडी आशीष शुक्ला ने बताया कि जेकेएम कंपनी को परियोजना का कार्यदायी संस्था बनाया गया था। मार्च-2016 में काम को पूरा करना था।

लेकिन कांस्ट्रक्शन कंपनी ने निर्माण में ढिलाई बरती। कई बार चेतावनी देने के बाद भी काम में तेजी नहीं आई। इस लिए कंपनी का टेंडर टर्मिनेट कर दिया गया है।

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