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सुहागिनों की पसंद हैं मिट्टी के बने करवे

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रायबरेली में शुक्रवार को कैपरगंज में करवा चौथ के मद्देनजर पीतल के करवे खरीदती महिलाएं। - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस दिन महिलाएं दिनभर भूखी-प्यासी रहकर व्रत रखती है और रात में चांद दिखने पर पूरे विधिविधान से पूजा-पाठ कर व्रत खोलती हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण करवा होता है। पीढ़ियां दर पीढ़ियां गुजरती जा रही हैं, लेकिन आज भी महिलाओं के लिए मिट्टी के बने करवा ही पहली पसंद हैं। वैसे तो बाजार में चांदी व पीतल के करवा भी आने लगे हैं, इसके बावजूद मिट्टी के बने करवा के पूजन विधि में शामिल करने की परंपरा बनी हुई है।
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करवाचौथ पर हर सुहागिन अपने पति के दीर्घायु एवं बेहतर स्वास्थ्य के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। इसमें करवा का होना बेहद जरूरी है। करवा चौथ व्रत के कुछ दिन ही शेष बचे हैं, ऐसे में कुम्हार करवा बनाने को अंतिम रूप देने में लगे हैं। इसमें हर कोई करवा को आकर्षक ढंग से सजाने में लगा हुआ है। फूल के साथ ही आकर्षक कलाकृतियां प्रमुख होती हैं। साथ ही इन्हें विभिन्न रंगों से सजाया जा रहा है। वैसे तो आधुनिक दौर में चांदी के करवे भी बाजार में है। इन सबके बावजूद आज भी सबसे अधिक बिक्री मिट्टी के बने करवों की हो रही है।
इससे कुम्हारों को अच्छी आमदनी होती है। मिट्टी के करवे 20 रुपये से लेकर 50 रुपये तक के हैं, जिनकी खरीदारी शुरू हो गई है। करवा चौथ को लेकर बाजार सज गया है। चांदी के करवे भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं चांदी के करवे भी इस बार आकर्षण का केंद्र बने हैं। इनकी कीमत तीन हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक है। सराफा व्यवसायी आशू गुप्ता व विमल सोनी का कहना है कि करवाचौथ पर चांदी के करवे सुहागिनों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हैं। महिलाएं खरीदारी भी कर रही हैं। शहर के सुपर मार्केट, सब्जी मंडी, डिग्री कॉलेज चौराहा, विशंभर मार्केट, कैपरगंज आदि स्थानों पर खरीदारी के लिए लोग पहुंच रहे हैं। पीतल से बने करवे भी बाजार में हैं। इनकी कीमत 200 रुपये से लेकर 900 रुपये तक है।
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