रायबरेली। दो माह पहले डीह थाने में दर्ज कराए गए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामले की जांच सीतापुर जिले स्थानांतरित कर दी गई है। इस मामले की विवेचना अब बिसवां सीओ अमन कुमार सिंह करेंगे।
सूत्रों का दावा है कि एआरटीओ, पीटीओ के चालकों समेत अन्य कई आरोपियों ने हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था कि उन पर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने जब इस प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे तो मामले के विवेचक सीओ सलोन घटना के सही तथ्य कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाए थे।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस अफसरों ने अपने को बचाने के लिए आननफानन जांच को दूसरे जनपद स्थानांतरित कर दी है। डीह थाना प्रभारी जितेंद्र मोहन सरोज की तरफ से 18 नवंबर 2025 को डीह थाने में रायबरेली के एआरटीओ, पीटीओ के दो चालकों के अलावा रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़ जिलों के चार-पांच अज्ञात कर्मचारी समेत 23 के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया गया था।
इन सभी पर ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली करने का आरोप लगा था। मामले में पुलिस ने महेंद्र प्रताप सिंह, जितेंद्र सरोज और होमगार्ड विश्वनाथ प्रताप सिंह उर्फ वीपी सिंह को जेल भेजा था। इस मामले की विवेचना सीओ सलोन कर रहे थे। सूत्रों का दावा है कि विवेचना लगभग पूरी हो गई थी। चार्जशीट भी जल्द दाखिल होने वाली थी।
मामला तूल पकड़ा तो बीते 12 जनवरी को गुपचुप तरीके से विवेचना सीतापुर ट्रांसफर कर दी गई। कहा जा रहा है कि इन दो माह में ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली की जांच से जुड़े सभी तथ्य एकत्र नहीं हो पाए थे। यही वजह रही कि पुलिस को किरकिरी का सामना करना पड़ा। सीओ सलोन यादुवेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि विवेचना सीतापुर जिले के बिसवां सीओ को सौंपी गई है।