रबी के सीजन में करीब 4200 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। जबकि करीब 2850 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है।
शारदा सहायक नहर में पानी की इस कमी से करीब 175 से अधिक रजबहे और माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
फसलों को सूखने से बचाने के लिए किसान नहरों में बंधा लगा लेते हैं, ऐसे में पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इससे टेल पर स्थित खेतों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
सबसे खास बात ये है कि जिले के 10 ब्लॉक क्षेत्रों की करीब 25 हजार हेक्टेयर खेती इससे प्रभावित है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शारदा सहायक नहर से सलोन, महराजगंज, बछरावां, हरचंदपुर, छतोह, डीह, जगतपुर, ऊंचाहार, रोहनिया और राही के कुछ गांवों के किसानों को पानी मिलता है।
नहर में पर्याप्त पानी न होने से राजामऊ, शोरा, बाला, बछरावां, लालपुर रजबहा, हरदासपुर, बरवारीपुर, जगतपुर, न्यू भांव, सलोन आदि माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सिंचाई के अभाव में फसल में रोग लगने की आशंका भी बनी हुई है, इसे लेकर किसान चिंतित हैं, लेकिन अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
गेहूं की पहली सिंचाई का समय आ गया है, लेकिन किसानों को खेतों को सींचने के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
किसान देशराज, हीरालाल, राज कुमार, संजय, राजेंद्र और इसरार ने कहा कि नहरों में पानी नहीं आ रहा है।
नलकूपों के भरोसे खेती मंहगी पड़ रही है। धान और गेहूं की एक-एक फसल में पहले ही किसान नुकसान उठा चुके हैं। सिंचाई की समस्या ऐसे ही रही तो गेहूं की यह फसल पर भी सूख जाएगी।
न तो अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि इसे गंभीरता से ले रहे हैं। आखिर किसान अपना दुखड़ा किसे सुनाएं।
सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी शमीम अब्बासी ने कहा कि शारदा सहायक नहर को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। इसके चलते माइनरों और रजबहों में पानी नहीं मिल पा रहा है।
उच्चाधिकारियों से पानी की डिमांड की गई है, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात की गई, लेकिन किसी ने कोई प्रयास नहीं किया।