रायबरेली। शहर से निकली ऐशबाग माइनर पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला आना शुरू हो गया है। सिटी मजिस्ट्रेट राम अवतार ने इनमें से सात अवैध कब्जेदारों के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी किया है। साथ ही कब्जेदारों पर 24 लाख 60 हजार रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है। बाकी बचे लंबित मामलों में भी कब्जेदारों के खिलाफ फैसला जल्द आने की उम्मीद है।
शहर से निकली ऐशबाग माइनर पर कब्जा करने वालों के खिलाफ अक्टूबर 2025 में सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में मुकदमा किया गया था। इसके बाद कब्जेदारों को नोटिस जारी कर कोर्ट ने सभी को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का मौका दिया था। इनमें से आठ वादों में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने बेदखली का आदेश दिया है।
सिटी मजिस्ट्रेट ने नयापुरवा निवासी कृष्णदेव पाल पर 5,14,538 रुपये, निर्मला यादव पर 5,81,428 रुपये, विवेकानंद कोचिंग पर 1,33,389 रुपये, वकील अहमद पर 7,76,580 रुपये, अकबरपुर कछवाह निवासी सुभाष कश्यप पर 2,70,328 रुपये, हितेंद्र कश्यप पर 48,980 रुपये और सोनिया नगर निवासी शिव कुमार के खिलाफ बेदखली के साथ ही 1,35,744 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
माइनर पर बना दिया मॉल, मकान, कोचिंग व अस्पताल
वर्ष 1917 में यह माइनर अस्तित्व में आई थी। कभी इस माइनर से जिला जेल में खेती होती थी। माइनर की लंबाई करीब 3.300 मीटर और चौड़ाई 18 मीटर है। 30 साल पहले इस माइनर का वजूद पूरी तरह खत्म हो गया। माइनर की जमीन पर अवैध तरह से कब्जा करने वालों ने कहीं मॉल तो कहीं मकान बना दिया। कई जगह नर्सिंग होम व कोचिंग सेंटर खुल गए।
प्रशासन और सिंचाई विभाग के अफसर माइनर पर हुए कब्जे को हटाने में नाकाम साबित हुए। वर्ष 2017 में जांच के बाद जिला प्रशासन ने अवैध कब्जेदारों को चिह्नित कर नोटिस भी भेजा। इसके बाद पिछले अक्टूबर माह में माइनर पर कब्जा करके मकान, कांप्लेक्स व अन्य प्रतिष्ठान संचालित करने वाले 91 कब्जेदारों पर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया गया।