रायबरेली। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की 42 शिकायतों को पंचायतीराज विभाग के अधिकारी दबाए बैठे हैं। मनमानी की हद तो तब हो गई, जब 11 शिकायतें डिफॉल्टर हो गईं। डीएम की फटकार के बाद डीपीआरओ ने लापरवाही बरत रहे जिले के 12 सहायक विकास अधिकारियों का वेतन रोक दिया। साथ ही नोटिस जारी करके तत्काल शिकायतों का निस्तारण करने का आदेश दिया है। ऐसा न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से ऑनलाइन आने वाली शिकायतों को निस्तारित करने के लिए मामलों को संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिया जाता है। पंचायतीराज विभाग के अधिकारी शिकायतों को निस्तारित करने में मनमानी कर रहे हैं। इस मनमानी के कारण आईजीआरएस की 42 शिकायतें लंबित हो गई हैं। इसमें 11 ऐसी शिकायतें हैं, जिनका निस्तारण न करने पर डिफॉल्टर हो गई हैं। जिले में सरेनी में दो, राही में चार, डलमऊ, दीनशाह गौरा, छतोह में एक-एक, हरचंदपुर में दो शिकायतें डिफॉल्टर हो गई हैं।
समीक्षा में डीएम ने डीपीआरओ के पेंच कसे तो उन्होंने एडीओ का वेतन ही रोक दिया। डीपीआरओ ने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सरेनी अनिल कुमार, एडीओ राही सईद अहमद, एडीओ डलमऊ कैलाशनाथ पटेल, एडीओ दीनशाह गौरा सतीशचंद्र, एडीओ छतोह जितेंद्र सिंह, एडीओ शिवगढ़ जितेंद्र बहादुर सिंह, एडीओ महराजगंज शिखर शुक्ला, एडीओ हरचंदपुर विवेक सिंह, एडीओ सलोन जयशंकर तिवारी, एडीओ डीह रामधारी प्रसाद, एडीओ रोहनियां विमलेश मिश्रा व एडीओ बछरावां में प्रेमपाल सिंह का वेतन रोकते हुए नोटिस देकर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। डीपीआरओ गिरीशचंद्र का कहना है कि 12 सहायक विकास अधिकारियों का वेतन रोका गया है। दो दिन में शिकायतों का निस्तारण न करने पर कार्रवाई की जाएगी।