खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। एक और नामी गिरामी कंपनी का उत्पाद जांच में फेल हो गया है। रॉयल ब्रांड हल्दी पाउडर में 12 प्रतिशत चावल स्टार्च पाया गया है।
राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला वाराणसी की जांच में इसका खुलासा हुआ है। यह नमूना शहर के रोडवेज बस अड्डे पर एक दुकान से भरा गया था।
नमूने की जांच रिपोर्ट आने के बाद दुकानदार व हल्दी पाउडर बनाने वाली कंपनी के खिलाफ एसडीएम के कोर्ट में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शहर के रोडवेज बस अड्डा स्थित किराने की एक दुकान से 9 मार्च 2015 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार की टीम ने रॉयल ब्रांड हल्दी पाउडर का नमूना भरा था।
नमूने को राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला वाराणसी भेजा गया था। गुरुवार को प्रयोगशाला से नमूने की जांच रिपोर्ट आ गई। जांच में हल्दी पाउडर का नमूना फेल पाया गया है।
हल्दी पाउडर में टरमरिक स्टार्च के अलावा 12 प्रतिशत चावल स्टार्च पाया गया है। ब्रांडेड जांच में मिलावटखोरी पकड़ में आने के बाद हल्दी पाउडर बनाने वाली कंपनी व संबंधित दुकानदार के खिलाफ एडीएम प्रशासन के कोर्ट में मुकदमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. बीरबल का कहना है कि हल्दी पाउडर में चावल मिला होने के कारण यह डाइबिटीज रोगियों के लिए ज्यादा नुकसानदेय है।
इसके प्रयोग से रोगी में शुगर की मात्रा बढे़ेगी। इसके अलावा गैस की बीमारी भी बढ़ सकती है। साथ ही खाने में स्वाद भी अच्छा नहीं होगा। सेहत के लिए ठीक नहीं है।
एफएसडीए के अभिहित अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि रॉयल ब्रांड हल्दी पाउडर के नमूने की रिपोर्ट आ गई है। जांच में हल्दी पाउडर में 12 प्रतिशत चावल स्टार्च मिला है।
मिलावट मिलने के बाद कंपनी व दुकानदार पर मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही एडीएम प्रशासन के कोर्ट में मुकदमा किया जाएगा।