सर्दी के साथ ही बसों के मुसाफिरों की मुश्किलें भी बढ़ गईं हैं। परिवहन निगम की बसों में लोगों को कंपकंपाते हुए सफर करना पड़ रहा है। बसों की खिड़कियों में शीशे तो लगे हैं, लेकिन जाम होने के कारण ज्यादातर बंद नहीं होते।
सर्द हवा के कारण पूरे सफर में लोग कांपते ही रहते हैं। इस अव्यवस्था के कारण मुसाफिर जहां परेशान हैं तो वहीं अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। रायबरेली डिपो में 147 बसें हैं। इनमें से 73 सरकारी और 74 बसें अनुबंधित हैं। बस स्टेशन के निकट ही डिपो का अपना वर्कशॉप है।
यहां पर रोडवेज की बसों का मेंटेनेंस होता है। बस की पूरी जांच, साफ सफाई और कमियों को दूर करने के बाद ही रूट पर भेजा जाता है। कर्मचारी इंजन, ईंधन समेेंत अन्य चीजों की जांच तो करते हैं, लेकिन मामूली कमियों पर ध्यान नहीं देते हैं। तमाम बसें ऐसी हैं जिनमें खिड़कियों के शीशे तो हैं, लेकिन वे जाम होने की वजह से बंद नहीं होते।
गर्मी का सीजन में तो इसका कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन सर्दी आते ही शीशों का न बंद होने से लोगों को कंपकंपाते हुए यात्रा करनी पड़ रही है। इसमें बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। परिवहन निगम और डिपो के अफसरों के तमाम दिशा-निर्देशों के बाद भी कर्मचारी बसों के रखरखाव को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं।
बस स्टेशन पर बसोें का इंतजार कर रहे यात्रियों ने परिवहन निगम के अफसरों की उदासीनता पर नाराजगी जताई। गुड्डू और जर्रार अहमद ने कहा कि सर्दी सफर वैसे भी कठिनाईयों भरा रहता है। शीशें न बंद होने से सर्दी और भी परेशान करती है।
सर्द हवा के कारण कई बार बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ जाते हैं। इंद्रभान सिंह और रंजना सिंह का कहना है कि निगम की ओर से बसों के रखरखाव में ढिलाई बरती जा रही है। इसका दंश मुसाफिरों को झेलना पड़ रहा है। इस पर अफसरों को ध्यान देना चाहिए।
वरिष्ठ केंद्र प्रभारी, रायबरेली डिपो एके त्रिपाठी का कहना है कि डिपो के वर्कशॉप में पूरी जांच के बाद ही बसों को रूट पर भेजा जाता है। ठंड में शीशे बंद न होने से यात्रियों को काफी परेशानी होती है। इसलिए वर्कशॉप के कर्मचारियों को शीशों की नियमित जांच के लिए कहा गया है।