रायबरेली। जिले में सोमवार को लगभग 12 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। बिजली गिरने से एक किसान की मौत हो गई। कई कच्चे मकान ढह गए। जिले में 90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस साल एक दिन में हुई सर्वाधिक वर्षा है। बारिश रविवार रात करीब तीन बजे शुरू हुई और सोमवार शाम तीन बजे तक रुक-रुककर जारी रही।
बारिश से सरकारी दफ्तर, रेलवे भूमिगत पुल, प्रमुख मार्ग और निचले मोहल्ले जलमग्न हो गए। खेत-तालाब लबालब हो गए और नदी-नाले भी उफान पर आ गए। शहर में नागरिकों के घरों में पानी घुस गया, जिससे उन्हें भारी परेशानी हुई। डीह क्षेत्र के पूरे काली मजरे रोखा निवासी 45 वर्षीय किसान भोला उर्फ भीखम की बिजली गिरने से मौत हो गई। वे सुबह नित्यक्रिया के लिए डीह रजबहा के पास गए थे।
तहसीलदार ऋचा सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पीड़ित परिवार को शीघ्र सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। किसान की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सेमरी क्षेत्र के गुमानखेड़ा गांव में नंदकुमार पासी का कच्चा मकान बारिश के कारण भरभराकर ढह गया। नंदकुमार, उनकी पत्नी सावित्री देवी, 17 माह की बेटी अवंतिका और मां यशोदा दरवाजे पर होने के कारण सुरक्षित बच गए। मकान ढहने से परिवार का गृहस्थी का सारा सामान नष्ट हो गया।
ग्राम प्रधान प्रशासक रामप्रकाश सिंह और लेखपाल आलोक सिंह ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया। उप जिलाधिकारी लालगंज राजेश कुमार श्रीवास्तव ने भी पीड़ित परिवार को शीघ्र सहायता राशि उपलब्ध कराने की बात कही है। बाबाखेड़ा निवासी जीतू लोधी का कमरा और ऊंचाहार के पूरे गौतमन में एक कच्चा मकान भी बरसात से गिर गया।
बारिश और जलभराव के कारण लोग केवल जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकले। शहर के नया पुरवा, रतापुर, कहारों का अड्डा और घोसियाना जैसे मोहल्लों में घरों में पानी घुस गया। गल्ला मंडी रोड सहित शहर की कई अन्य सड़कें बारिश से बह गईं या जलमग्न हो गईं। इससे नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के अलावा राही, लालगंज, सलोन और डलमऊ जैसे अन्य कस्बों में भी जलभराव से लोगों को परेशानी हुई।
जिला अस्पताल और दफ्तरों में भरा पानी
जिला पुरुष अस्पताल के बच्चा वार्ड में भी पानी भर गया, जिससे मरीजों को दिक्कत हुई। विकास भवन, कलेक्ट्रेट और बस स्टेशन जैसे सरकारी दफ्तरों में भी जलभराव से अफसरों व कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ी। एनटीपीसी परियोजना के आवासीय परिसर में जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय स्टेट बैंक परिसर और संयंत्र के स्विच यार्ड में भी पानी भर गया।
गंदगी से नाले चोक, जल निकासी हुई बंद
शहर के बड़े नालों की सफाई कुछ कर्मचारियों के भरोसे औपचारिकता बनकर रह गई। बारिश का पानी नालों में गिरा व वहां पहले से जमा गंदगी के कारण नाले उफना गए और जल निकासी बंद हो गई। इसका परिणाम रहा कि शहर के प्रमुख मार्ग, बाजार जलमग्न नजर आए। दिनेश यादव, अर्जुन तिवारी, वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि नाला सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। नगर पालिका के ईओ स्वर्ण सिंह ने बताया कि हर वार्ड में कर्मचारियों से नालों की सफाई कराई गई थी। बारिश में सड़कों पर पानी भरना आम बात है। जहां पर भी जलभराव है, वहां पर पानी निकासी कराई जा रही है।
किसानों के खिले चेहरे
एक तरफ जलभराव से लोग बेहाल हैं तो वहीं बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। बारिश से सबसे ज्यादा फायदा धान की फसल को हुआ है। बारिश से किसानों को धान की फसल की सिंचाई नहीं करनी पड़ रही है। जिले में इस बार एक लाख 61 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की रोपाई की गई है। किसान गोवर्धन वर्मा, सुरेंद्र पासी, अर्जुन बताते हैं कि बारिश से धान की फसल पैदावार की उम्मीद बढ़ी है। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि बारिश धान की फसल के लिए संजीवनी से कम नहीं है।
रेलवे स्टेशन रोड पर जलभराव से निकलते वाहन।
रेलवे स्टेशन रोड पर जलभराव से निकलते वाहन।
रेलवे स्टेशन रोड पर जलभराव से निकलते वाहन।