अलीपुर में आयोजित संत सम्मेलन में कथा सुनते भक्त।
- फोटो : अलीपुर में आयोजित संत सम्मेलन में कथा सुनते भक्त।
हलोर। कुशलगंज मजरे अलीपुर में चल रहे संत सम्मेलन में शुक्रवार को संतों ने ज्ञान गंगा बहाई। कार्यक्रम का आरंभ बाराबंकी से आए हरिनारायण तिवारी अवधी सम्राट की वाणी से हुआ। उन्होंने श्रीराम नाम के महत्व और अवधपति के गुणों का वर्णन कर कथा को गति दी। मानस प्रेमियों ने बताया कि रामचरित मानस से जीवन की विसंगतियां दूर की जा सकती है।
दमोह मध्य प्रदेश से आए पवन मनु (सूरदास जी) ने हनुमंत लाल जी के महावीर बनने का विश्लेषण किया। उन्होंने सुंदरकांड की सुंदरता का भी मनोहारी वर्णन कर श्रोताओं को आनंदित किया। नेपाल से आए नेपाली बाबा ने कहा कि रामचरितमानस से जीवन की विसंगतियों का निराकरण हो सकता है। राष्ट्रपति पुरस्कृत साहित्यकार रामेश्वरप्रसाद द्विवेदी प्रलयंकर ने राम नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने जन-जन के जीवन में राम नाम की महत्ता और उसके प्रभाव के बारे में बताया।
बांदा से आए यज्ञेश मिश्र ने कहा कि गुरु महिमा, राम कथा श्रवण से सामाजिक उत्थान हो सकता है। इटावा से आए श्री राघव किशोर रामायणी ने बताया कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ है। यह अवधी भाषा में रचित एक महाकाव्य है, जो जीवन जीने की कला सिखाता है। यह सत्य, प्रेम, त्याग और कर्तव्य जैसे नैतिक मूल्यों का दिव्य मार्गदर्शक है। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर डॉ. महेश तिवारी, पंकज कुमार गौतम, राम प्रकाश सिंह चौहान, कुलदीप सिंह, ओम प्रकाश मिश्रा, सिकंदर सिंह, संजय मिश्रा, जगमोहन यादव, मनीष दीक्षित, नीलकंठ दीक्षित, प्रमोद मिश्रा, दान बहादुर सिंह मौजूद रहे।