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थाली से सब्जी खा गई महंगाई, घर चलाना मुश्किल

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रायबरेली। सब्जियों के मामले में आलू, टमाटर और प्याज को रसोई की सबसे बड़ी जरूरत माना जाता है, इनकी कीमतों में थोड़ा भी फेरबदल होते ही हर किसी का रसोई का बजट बिगड़ जाता है। पिछले 15 दिनों की अपेक्षा अब सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। सब्जियों की महंगाई की वजह अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में बारिश का होना माना जा रहा है।
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दिवाली के चार-पांच दिन पहले से ही टमाटर के अलावा अन्य सब्जियों के दाम बढ़ने लगे थे। अभी भी टमाटर का भाव 80 रुपये प्रतिकिलो से नीचे नहीं आया है। इसी तरह आलू, सोया मेथी, परवल, कद्दू, तोरई के दाम भी आसमान छू रहे है।
कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. एसवी सिंह ने बताया कि अक्तूबर व नवंबर में आने वाली सब्जियों की बोआई सितंबर महीने के अंतिम समय तक की जाती है, लेकिन अक्तूबर महीने में बारिश होने की वजह से तैयार टमाटर, गोभी, बंद गोभी समेत अन्य सब्जियों की फसलें चौपट हो गईं। यही नहीं इन फसलों की नर्सरी को भी खासा नुकसान हुआ। यही वजह है कि सब्जियों के दाम बढ़े हुए हैं।
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शहजादा कोठी की रश्मि श्रीवास्तव और प्रगतिपुरम कॉलोनी की रहने वाली हिमानी गुप्ता ने बताया कि महंगाई दिन ब दिन बढ़ रही है। सरसों का तेल, दाल के दाम पहले ही पहुंच से बाहर हैं। अब सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे है। इससे गृहस्थी चलाना मुश्किल हो रहा है।
हरी सब्जियों के दाम तो दोगुने हो गए हैं। ऐसे में आलू, प्याज से ही काम चलाना पड़ रहा है। गिरफशाह का पुरवा की अनुराधा त्रिपाठी, महिपाल नगर की रहने वाली अर्चना सक्सेना ने बताया कि घरेलू सामान और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे है। पिछले महीने का खर्च जहां छह-सात हजार रुपये में चल जाता था। वहीं इस महीने बढ़कर नौ से 10 हजार हो गया है। बढ़ती महंगाई के चलते घर चलाना बड़ा मुश्किल हो गया है।
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15 दिन पहले और अब सब्जियों के दाम प्रति रुपये किलो
पहले अब
आलू 20 30
टमाटर 40 80
लौकी 10 30
मूली 30 40
बैगन 20 40
करेला 50 70
परवल 40 80
कद्दू 15 20
तरोई 20 40
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