रायबरेली। शहर के रेलवे स्टेशन की तीन रेल लाइनों पर पुरानी पटरियां हटाकर नई पटरियां लगाई जानी हैं। इसके लिए नई रेल पटरियों के टुकड़े लाइन किनारे पहले ही रखे जा चुके हैं। पटरियों के टुकड़े जोड़ने के लिए फ्लश बट मशीन का मोबाइल प्लांट शनिवार को रेलवे स्टेशन पहुंच गया और काम शुरू कर दिया गया। पहले दिन लाइन नंबर तीन पर दोपहर में करीब तीन घंटे का ट्रैफिक ब्लॉक लेकर काम कराया गया। इस प्लांट से पटरियां जोड़ने के बाद उनमें दरारें नहीं आएंगी और रेलवे ट्रैक की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
रायबरेली रेलवे स्टेशन पर पांच प्लेटफार्म हैं, जबकि रेल लाइनों की संख्या आठ है। वर्तमान में चार प्लेटफार्मों पर ही ट्रेनें रुकती हैं। बाकी रेल लाइनों से ट्रेनों का आवागमन बिना रुके होता है या फिर इन लाइनों पर मालगाड़ी अथवा नए कोच की रेक खड़ी रहती है। रेल लाइन नंबर दो और तीन पर 800-800 मीटर, जबकि रेल लाइन नंबर एक पर करीब 400 मीटर ट्रैक की पुरानी पटरियां बदली जानी हैं। मार्च से काम शुरू हो गया था।
अप्रैल में क्रेन युक्त स्पेशल ट्रेन यूटिलिटी ट्रैक व्हीकल के जरिए नई पटरियां भी आने लगीं, जिन्हें तीनों रेल लाइनों के किनारे रख दिया गया है। पटरियों के बड़े-बड़े टुकड़े हैं, जिन्हें जोड़ने के बाद ट्रैक पर बिछाया जाएगा। पटरियां जोड़ने के लिए फ्लश बट मशीन आ गई है और काम शुरू हो गया है। यह काम करीब एक हफ्ते तक चलेगा। इसके बाद पटरियां बिछाने के लिए दूसरी मशीन मंगाई जाएगी।
सिकुड़ने या फैलने का खतरा नहीं
पटरियों को जोड़़ने के लिए आई फ्लश बट मशीन एक तरह का मोबाइल प्लांट है, जिसे ट्रक में मशीनोंं को फिट करके तैयार किया गया है। इसमें ट्रक के पहियों के साथ रेल पहिये भी लगाए गए हैं, ताकि सड़क और रेल मार्ग दोनों पर दौड़ सके। वरिष्ठ खंड अभियंता (रेल पथ) विजय कालरा का कहना है कि फ्लश बट मशीन सड़क मार्ग से कुछ दिन पहले आई, जिसे रेलवे ट्रैक पर अब उतारा गया है। अभी तक पटरियों को जोड़ने के लिए वेल्डिंग होती थी, जिसमें दरार आने की संभावना रहती थी। फ्लश बट मशीन से जोड़ने पर दरार नहीं आएगी और मौसम बदलने पर पटरियों के सिकुड़ने या फैलने का खतरा भी नहीं होगा।
एक नंबर रेल लाइन पर स्लीपर भी बदले जाएंगे
जिन तीन रेल लाइनों पर पटरियां बदली जानी हैं, उनमें लाइन नंबर तीन पर स्लीपर बदलने का काम मार्च में हो चुका है। लाइन नंबर एक पर स्लीपर बदलने का काम इसी महीने के अंत तक कराया जाएगा। इसके लिए स्लीपर मंगाए जा चुके हैं। जिस समय पटरियां बदली जाएंगी, उसी समय नए स्लीपर भी लगा दिए जाएंगे। लाइन नंबर दो पर कंक्रीट ट्रैक है, जिससे स्लीपर बदलने की जरूरत नहीं है।