स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को सात झोलाछाप के यहां पर छापा मारा। इनके पास कोई दस्तावेज नहीं था। बावजूद रोगियों का इलाज किया जा रहा था। एसीएमओ की ओर से छापा मारने वाली टीम ने दवा चेक की। नोटिस देकर स्पष्टीकरण तलब किया और लौट आई। कमोवेश हर छापेमारी में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की ओर से यही कहानी गढ़ी जाती है।
सवाल उठता है कि रोगियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होता है तो फिर कार्रवाई के बजाय नोटिस क्यों थमाया जाता है। यदि नोटिस देना जरूरी है तो नोटिस के बाद कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं होती। सीएमओ डॉ. डीके सिंह के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. एसके चक व रूपक श्रीवास्तव की टीम ने डलमऊ, जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र में एक के बाद एक सात झोलाछाप के यहां पर छापे डाले गए।
डलमऊ के बलभद्रपुर चौराहा स्थित लालता राम कान्हा, मुराईबाग में रमेश, यहीं पर प्रमोद, हिम्मत सिंह, कुटिया चौराहा भरसना में राम प्यारे, जगतपुर के विश्वनाथगंज में मुन्ना, मेलखा साहब में सरयू प्रसाद शुक्ला के यहां पर छापे पड़े। मौके से कोई दस्तावेज नहीं मिला। रोगियों का इलाज किया जा रहा था। जांच और मौके पर कुछ देर समय बिताने के बाद टीम लौट आई।
सीएमओ डॉ. डीके सिंह का कहना है कि सभी सात झोलाछाप को नोटिस दिया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से झोलाछाप के खिलाफ अभियान तो चलाया जा रहा है, लेकिन यह खानापूरी तक सीमित है। कार्रवाई के नाम पर नोटिस थमाकर इतिश्री कर ली जाती है।