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क्षमता के हिसाब से नहीं चल रहे पंप, कैसे पहुंचे खेतों तक पानी

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रायबरेली में मंगलवार को डलमऊ पंप कैनाल। - फोटो : RAIBARAILY
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डलमऊ-गदागंज। डलमऊ पंप कैनाल में लगी मोटर और पंप बेकार हो गए हैं। यही वजह है कि किसानों को भरपूर पानी नहीं मिल पा रहा है। मोटरें तो चलती हैं, लेकिन उनसे आधा पानी ही निकलता है।
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हमेशा यहां कोई न कोई मोटर या पंप खराब ही रहता है। इस वजह से नहरों में भरपूर पानी नहीं पहुंच रहा है। फसलों की सिंचाई करने के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। डलमऊ पंप कैनाल से करीब 70 नहरें निकली हैं। भरपूर पानी न आने से अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
डलमऊ पंप कैनाल में 20 पंप लगे हैं। मंगलवार को 14 पंप चलते मिले, लेकिन किसी पंप से आधा पानी तो किसी में केवल नाम मात्र का निकल रहा था। इस वजह से डलमऊ पंप कैनाल से जुड़ी नहरों में भरपूर पानी नहीं पहुंच रहा है।
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पंप कैनाल से डलमऊ, दीनशाह गौरा, ऊंचाहार, जगतपुर, रोहनिया, सदर, सतांव ब्लॉक क्षेत्र के किसान सिंचाई करते हैं। इस पंप कैनाल से करीब 22 हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल सिंचाई होती है। पंप कैनाल में लगी मोटरें और पंप कई साल पुराने हैं, जिन्हें ठोक पीटकर चलाया जा रहा है।
उधर, अधिशासी अभियंता दक्षिणी हेमंत कुमार ने बताया कि इस समय पानी की मांग ज्यादा है। मांग के हिसाब से पंप कैनाल नहीं चलते हैं। इस वजह से पानी पहुंचाने में दिक्कत होती है। भरपूर क्षमता से पंप चलाने के लिए कहा गया है।
कभी ज्यादा तो कभी गायब हो जाता पानी
गदागंज। दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र के किसानों का कहना है कि कभी तो पानी इतना ज्यादा हो जाता है नहरें उफनाकर कट जाती हैं, लेकिन कभी-कभी पानी ही नहीं पहुंचता है। मौजूदा समय में गेहूं की सिंचाई के लिए पानी की बहुत जरूरत है, लेकिन भरपूर पानी नहीं मिलने की वजह से दो चार होना पड़ता है। किसान ओम प्रकाश मौर्य, दिनेश शर्मा, शिव बहादुर, रंजीत मौर्य ने बताया कि इस समय में गेहूं की फसल में बालियां निकल रही है। इस समय यदि पानी नहीं मिला तो उत्पादन घट जाएगा।
गंगा के जलस्तर में कमी के चलते होती दिक्कत
इस समय गंगा का जलस्तर कम है। इस वजह से कोई-कोई पंप कम पानी उठा रहे हैं, लेकिन मांग पूरी करने के लिए ज्यादा पंप चलाकर मांग पूरी की जाती है। कुछ पंप मरम्मत के लायक हैं, जिन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। सिंचाई खंड दक्षिणी के अभियंता एक साथ सभी नहरों में पानी पहुंचाया रहे हैं, जबकि रोस्टिंग के हिसाब से पानी पहुंचाना चाहिए। पानी की कमी को देखते हुए रोस्टिंग से नहरों को चलाया जाए।
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एके सिंह, अधिशासी अभियंता, खंड छह
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